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रायपुर। गर्भकाल में शिशुओं में होने वाले जेनेटिक बदलाव के दौरान उपजी मोर्फान सिंड्रोम की परेशानी से दो मरीजों को एम्स के चिकित्सकों ने निजात दिला दी। बेंटाल सर्जरी के माध्यम से उनके हृदय की महाधमनी में होने वाली रुकावट को दूर किया गया। बढ़ती उम्र के साथ उनकी समस्या भी गंभीर होती जा रही थी। चिकित्सकों का कहना है कि, अमेरिकन हॉर्ट एसोसिएशन के एक शोध के मुताबिक तीन से पांच हजार बच्चों में से एक को यह  बीमारी जन्मजात होने की आशंका होती है। 60 से 80 प्रतिशत रोगियों को इस प्रकार की समस्या होने पर तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी के बाद दोनों मरीजों को कुछ दिन चिकित्सकों की निगरानी में रखकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। 

दुर्ग के 35 वर्षीय, कबीरधाम के 18 वर्षीय स्कूली छात्र को सांस लेने में हो रही दिक्कत पर उपचार के लिए एम्स लाया गया था। जांच में आनुवांशिक बीमारी का पता चला, जिसमें गर्भकाल में शिशु में जेनेटिक बदलाव के कारण क्रोमोसोम्स में दिक्कत से हृदय और आंख की मांसपेशियां और उतक विकसित नहीं हो पाते। इससे हृदय की महाधमनी की मांसपेशियों में अत्यधिक फैलाव, लीकेज, हार्ट फेल होना और महाधमनी के फटने की चुनौती रहती है। बढ़ती उम्र के साथ इसका और अधिक प्रभाव दिखने लगता है। इससे सांस फूलना, अत्यधिक थकावट, कमजोरी के लक्षण आने लगते हैं। लगभग आठ घंटे लंबी चुनौतीपूर्ण कार्डियक सर्जरी पूरी की गई।

इन चिकित्सकों का रहा योगदान

दोनों मरीजों का ऑपरेशन करने में एम्स के सर्जन डॉ. जी. सौरभ, डॉ. निरूपम चक्रवर्ती, डॉ. प्रनय, डॉ. स्नेहा और मुख्य कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ सुबता सिंगा, डॉ. जितेंद्र ने सर्जरी की। पूर्व की जांच को डॉ. सत्यजीत, डॉ. सुरेंद्र नायक और प्रो. नरेंद्र बोधे, डॉ. अनिल, डॉ. संदीप, डॉ. अखिलेश, डॉ. गासपर, डॉ. मनीष, डॉ. अर्पित, डॉ. अमृतांश के साथ पूरा किया।