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आज इस कड़ी में छत्तीसगढ़ के उस भूभाग की बात करेंगे जो केरल राज्य से भी बड़ा है। जिसे प्रकृति ने अपनी खूबसूरती से भरपूर नवाजा है, जहां कायनात खुल कर मुस्कुराती है, यहां के जंगल रहस्यों को समेटे हैं, जहां अनोखे अंदाज में मनाए जाते हैं त्योहार और जहां जहां कुदरत ने खुद डेरा डाल रखा है।

अगर आप शहरों की तेज रफ्तार जिंदगी से थक चुके हैं और सुकून के कुछ पल प्रकृति की गोद में बिताना चाहते हैं तो बस्तर आपका स्वागत कर रहा है। बस्तर की वादियां अनेकों झरनों को खुद में समेटे हैं, आज हम आपको दे रहे हैं छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख वॉटरफॉल और एक रहस्यमयी गुफा की जानकारी। 

छत्तीसगढ़ का नियाग्रा- चित्रकोट

जगदलपुर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात। यहां बस्तर की जीवनदायिनी इन्द्रावती नदी मनमोहक जलप्रपात का निर्माण करती है और 90 फीट की ऊंचाई से गिरती है। ये छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा, सबसे चौड़ा और सबसे ज्यादा जल की मात्रा प्रवाहित करने वाला जलप्रपात है। इस प्रपात की चौड़ाई 985 फीट है। इसकी बनावट अमेरिका के नियाग्रा वॉटरफॉल के समान दिखती है इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का या भारत का नियाग्रा भी कहते हैं। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से आते हैं। चित्रकोट जलप्रपात का नजारा रात में भी खूबसूरत नजर आता है, इस नजारे को और खूबसूरत बनाने के लिए यहां प्रशासन द्वारा दूधिया रोशनी की व्यवस्था की है। चित्रकोट जलप्रपात का असल रोमांच घाटी से नीचे उतरने के बाद होता है। यहां स्थानीय आदिवासियों की ओर से बोटिंग की भी व्यवस्था की गई है। 

दंडामी रिसॉर्ट 

छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग ने चित्रकोट जलप्रपात के पास ही ठहरने के अच्छे इंतजाम किए हैं, पर्यटन विभाग की ओर से यहां दंडामी रिसॉर्ट बनाए गए हैं, पूर्णसुविधा संपन्न हट के आकार में बने ये रिसोर्ट देखने में भी बेहद सुंदर हैं। पर्यटन विभाग के कॉटेज के अलावा पीडब्लूडी विभाग की ओर से भी यहां रिजॉर्ट उपलब्ध हैं। जहां कमरे की बालकनी में बैठे-बैठे भी आप जलप्रपात की खूबसूरती को निहार सकते हैं।  

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अद्भुत है तीरथगढ़ जलप्रपात

जगदलपुर से करीब 35 किलामीटर की दूरी पर स्थित है तीरथगढ़ जलप्रपात। कांगेर घाटी नेशनल पार्क में कांगेर नदी की सहायक नदी मुनगा और बहार नदी इस खूबसूरत झरने का निर्माण करती है। इसकी ऊंचाई लगभग 300 फीट है और यह छत्तीसगढ़ के सबसे ऊंचे जलप्रपातों में से एक है। घाटी में बनी सीढ़ी नुमा प्राकृतिक संरचनाओं से गिरता पानी दूधिया दिखाई देता हैं जो देखने में बहुत ही मनमोहक है। एडवेंचर और फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए तीरथगढ़ जलप्रपात बेस्ट डेस्टीनेशन है। खास बात ये है कि इस एक झरने में ही तीन झरनों के नजारे देखने को मिलते हैं, ये घाटी इतनी गहरी है कि तीन जगह झरने का निर्माण करती है। जैसे जैसे आप सीढ़ियों से नीचे उतरते जाते हैं झरने की खूबसूरती और बढ़ती जाती है। 

कुटुमसर की रहस्यमयी दुनिया

बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है कुटुमसर गुफा। इस हैरत अंगेज प्राकृतिक भूमिगत गुफा के भीतर अंधेरे में बसती है एक रहस्यमयी दुनिया। कुटुमसर गुफा की गहराई जमीन से करीब 72 फीट तक है। इसकी लंबाई लगभग 330 मीटर है। इस कारण ये भारत की सबसे गहरी गुफा में से एक मानी जाती है। कुटुमसर गुफा करोड़ों साल पुरानी है जो केगर नदी के किनारे स्थित चूना पत्थर बेल्ट पर बनी है। इस गुफा के अंदर चूना पत्थर से बनी स्टेक्टेलाइट और स्टेलेग्माईट की कई शानदार आकृतियां है। इस गुफा में घनघोर अंधेरा रहता है। गुफा तक जाने के लिए वन विभाग की ओर से जिप्सी की व्यवस्था की गई है, निजी वाहन भीतर ले जाने की इजाजत नहीं है। जिप्सी 1500 रुपए का शुल्क जमाकर बुक करानी होता है, इसमें एक गाइड भी शामिल रहता है।

गुफा के भीतर हैं अंधी मछलियां

इस गुफा की खोज प्रोफेसर शंकर तिवारी ने की थी। एक अध्ययन से पता चला है कि करोड़ों साल पहले प्रागैतिहासिक काल में कुटुमसर की गुफाओं में मनुष्य रहा करते थे। पानी से घिरी हुई कुटुमसर गुफा में अंधी मछलियां रहती है। अनुमान है कि यहां करोड़ो वर्षो से सूर्य की किरण नहीं पहुंच पाई जिससे यहां घनघोर अंधेरा रहता है। जिसके कारण यहां कि मछलियों की आखों पर एक पतली झिल्ली चढ़ चुकी है, जिससे वे पूरी तरह अंधी हो गई हैं। मानसून के दौरान इस गुफा के भीतर कई छोटी नदियां बहती हैं, जिस कारण बरसात के दिनों में इस गुफा में प्रवेश करने की मनाही रहती है। बाकी के दिनों में भी यहां आने के लिए वक्त तय किया गया है।

ऐसे पहुंचें
 
यहां पहुंचने के लिए आवागमन के तमाम साधन उपलब्ध हैं। जिला मुख्यालय जगदलपुर से भी हवाई सेवा शुरू हो चुकी है, वहीं हवाई मार्ग से राजधानी रायपुर पहुंचकर सड़क के रास्ते धमतरी, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव होते हुए जगदलपुर पहुंचा जा सकता है। राजधानी रायपुर से जगदलपुर शहर की दूरी करीब 300 किलोमीटर है।

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