अक्षय तृतीया करीब है, उससे पहले शादियों का मुहूर्त शुरू हो चुका है और इस मुहूर्त के साथ ही बारातियों का जानलेवा सफर भी प्रारंभ हो गया है। 

गरियाबंद। अक्षय तृतीया करीब है, उससे पहले शादियों का मुहूर्त शुरू हो चुका है और इस मुहूर्त के साथ ही बारातियों का जानलेवा सफर भी प्रारंभ हो गया है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बारातियों को ढोते मालवाहकों की ऐसी तस्वीर आम है। यह हर साल होता है और हर इलाके में होता है। इसे मजबूरी कम, लापरवाही ज्यादा कही जाएगी। ये तस्वीरें गरियाबंद जिले की हैं। 

हरिभूमि ने एक ही दिन में एक नहीं बल्कि कई ओवरलोड मालवाहक वाहनों में लोगों को ढोते हुए तस्वीरें कैद की हैं। इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह दर्जनों लोग एक ही गाड़ी में ठसाठस भरे हुए है। इस समय क्षेत्र में भीषण गर्मी अपने चरम पर है। तेज धूप और लू के बीच सफर करना पहले ही मुश्किल है, लेकिन इसके बावजूद लोग बिना किसी सुरक्षा के मालवाहक गाड़ियों में सफर कर रहे हैं। 

कई लोग गाड़ी के किनारों और पीछे लटककर सफर करते नजर 
भीड़‌भाड़ और हवा की कमी के कारण हीट स्ट्रोक, चक्कर और दम घुटने जैसी समस्याओं का खतरा और बढ़ जाता है। जिले के ग्रामीण इलाकों में ट्रक, पिकअप और अन्य मालवाहक वाहन अब बारात ले जाने का साधन बनते जा रहे हैं। इन गाड़ियों में क्षमता से कई गुना ज्यादा लोगों को बैठाया जा रहा है। कई लोग गाड़ी के किनारों और पीछे लटककर सफर करते नजर आते हैं।

खुलेआम नियमों की अनदेखी  हो रही 
प्रबुद्धजनों के अनुसार, इस तरह का सफर कभी भी बड़े हादसे में बदल सकता है। ओवरलोडिंग और असंतुलन के कारण दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद कार्रवाई न होना भी सवाल खड़े करता है। खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग नजर नहीं आ रहा। शादी की खुशियां अपनी जगह हैं, लेकिन जान से बढ़कर कुछ नहीं। खासकर इस भीषण गर्मी में इस तरह का जोखिम और खतरनाक साबित हो सकता है। जरूरी है कि लोग सुरक्षित साधनों का उपयोग करें और प्रशासन भी इस पर सख्ती बरते, ताकि खुशियों का यह मौसम किसी हादसे में न बदल जाए।

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