A PHP Error was encountered
Severity: Warning
Message: Undefined variable $summary
Filename: widgets/story.php
Line Number: 3
Backtrace:
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/mobile/widgets/story.php
Line: 3
Function: _error_handler
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/amp/story.php
Line: 39
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 507
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 341
Function: loadAmpTheme
File: /content/websites/front-hbm/application/controllers/Content.php
Line: 303
Function: contentStorypageAmp
File: /content/websites/front-hbm/index.php
Line: 319
Function: require_once
मयंक शर्मा- जशपुर- कोतबा। छत्तीसगढ़ के कोतबा में अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीएम विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय भी शामिल हुई। इस दौरान उन्होंने डॉ चिन्मय पंड्या से आशीर्वाद प्राप्त कर चादर,गायत्री माता की प्रतिमा के साथ गुरुदेव को साहित्य भेंट किया।
इस अवसर पर कौशल्या साय ने यज्ञशाला के प्रवचन मंच से याजकों को संबोधित करते हुए कहा कि, उन्हें सतत गुरुसत्ता का आशीर्वाद मिलता रहा है। मुझे अपने आदिवासी होने पर गर्व है। हमेशा से ही हमें डॉ पंड्या का सतत आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता रहता है। आगे उन्होंने कहा कि, चौबीस सालों के कार्यकाल में सतत जनसेवा का कार्य उन्होंने किया है। जिसका परिणाम है कि आदिवासी नेतृत्व के रुप में उनके पति सीएम विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री जैसे पद पर आसीन हुए हैं।
आदिवासी सनातन संस्कृति के संवाहक रहे हैं - कौशल्या साय
आदिवासी हमेशा से सनातन संस्कृति के संवाहक रहे हैं जो हिंदुत्व का झंडा हमेशा बुलंद करते आए हैं। साय ने कहा कि, हमेशा हम दूसरों के लिए जीना सीखें। आपके स्वयं का व्यक्तित्व आपके बच्चों पर असर डालता है आप ऐसा कर्म करें जिससे आपके बच्चे भी सीखें। समस्याओं को हमेशा पीछे रखें और खुशियों को आगे रखें। साथ ही उन्होंने भारतीय परंपरा के पालन का निवेदन किया।
गुरुदेव से लिया आशीर्वाद
इस अवसर पर अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि, जब वे चौथी कक्षा में पढ़ती थीं तब से वे अखंड ज्योति पढ़ती आई हैं। गुरुदेव के साहित्य में प्रेरणाप्रद कहानियों से उनमें पढ़ने की ललक जागृत हुई है। जिसके कारण आज वे देवमंच पर बोलने के काबिल बनीं हैं। उन्होंने गुरुसत्ता के प्रति श्रद्धा भाव से नमन करते हुए डॉ पंड्या से आशीर्वाद लिया।
