सूरजपुर के धान केंद्रों में गड़बड़ी: सारारावां केंद्र से 80 लाख का धान गायब, प्रशासन में मचा हड़कंप

सूरजपुर के धान केंद्रों में गड़बड़ी
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धान केंद्र

सूरजपुर जिले के सारारावां धान खरीदी केंद्र से करीब 80 लाख रुपये मूल्य का 2,588 क्विंटल धान गायब मिला। प्रशासनिक जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

नौशाद अहमद- सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में धान केंद्रो से लगातार धान की हेराफेरी के मामले सामने आ रहे है। जहां सारारावाँ धान केंद से 80 लाख के धान कम मिलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। दरअसल, धान खरीदी में कुछ हफ्ते ही बचे हैं। ऐसे में लगातार जिला प्रशासन की टीम धान केंद्रो का निरीक्षण कर रही है।

इसी दौरान भैयाथान तहसीलदार के साथ सयुक्त टीम पहुंचकर सारारावाँ धान खरीदी केंद्र का पहुच कर जब धान खरीदी की गई बोरी की गिनती करती है। तो करीब 80 लाख रुपये मूल्य का धान गायब मिलता है। जिसके बाद तो प्रशासन में हड़कंप मच गया है। टीम को जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएँ मिली। वहीं जांच में पाया गया कि, चालू खरीदी वर्ष में इस केंद्र पर अब तक 4842 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई है। जिसमें से 240 क्विंटल धान का उठाव हो चुका है।

गायब धान की बाजार कीमत करीब 80 लाख रुपये
इस हिसाब से केंद्र में 40 हजार 602 क्विंटल धान मौजूद होना चाहिए था। लेकिन भौतिक सत्यापन में केवल 34 हजार 132 क्विंटल धान ही पाया गया। यानि केंद्र से 6470 बोरी धान गायब है, जिसका कुल वजन 2588 क्विंटल आंका गया है। गायब धान की बाजार कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है। जब निगरानी समिति ने गायब धान को लेकर समिति प्रबंधक से जानकारी मांगी। तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद निगरानी समिति ने पूरे मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और धान खरीदी केंद्र के संचालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।

जांच रिपोर्ट आने के बाद होगा खुलासा
इस पूरे मामले में आशंका जताई जा रही है कि, अवैध तरीके से किसानों के खातों में धान की बिक्री दर्ज की गई, जबकि वास्तव में धान की खरीदी हुई ही नहीं है। वहीं यह भी शक है कि, सरकारी धान की खरीद-बिक्री में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई है। फिलहाल, धान की इस भारी कमी की असल वजह क्या है। इसका खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। विभाग ने साफ किया है कि, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। धान खरदी को लेकर सरकार शुरू से ही भी गंभीर है और लगतार प्रदेश के मंत्री विधायक जनप्रतिनिधि धान केंद्र में पहुंचकर किसानों की समस्या सुन रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान तीन हज़ार बोरी कम पाया गया
वहीं प्रशासन ने भी धान खरीदी को लेकर कई टीम बनाकर निरीक्षण का काम कर रही है। पर सूरजपुर में अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है एक और जहां रामानुज नगर तहसीलदार द्वारा छिंदया धान केन्द्र में पहुँच कर धान का निरीक्षण के दौरान करीब तीन हज़ार बोरी कम पाया जाता है। जिसकी कीमत करीब 20 लाख बताया गया। जिसके बाद तहसीलदार द्वारा जिले के अधिकारियों इसकी जानकारी दी जाती है और उसके बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच टीम बनाया जाता है। जिसमें जिले के खाद्य अधिकारी नोडल अधिकारी तहसीलदार पटवारी पहुंचते हैं और धान की फिर से गिनती की जाती है। जिसमें सब सही पाया जाता है, तो आखिर सवाल यह है कि तहसीलदार के द्वारा पहले जो जांच किया गया था। वह गलत था या फिर तहसीलदार के साथ बाकी टीम ने जो गिनती की है, वह गलत है। इस जांच ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

करोड़ों के घोटाले आ चुके हैं सामने
सूरजपुर जिले की बात करें तो इससे पहेले भी धान केंद्रों में करोड़ों के घोटाले के मामले सामने आ चुके हैं। अब देखना होगा कि, ऐसे लोगों के ऊपर किस तरह की कार्यवाही होती है और बाकी के जो दिन धान खरीदी में बचा है, उस पर प्रशासन किस तरह से काम करती है।

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