मास्टर जी का अनूठा कारनामा: खुद स्कूल जाते नहीं, रख लिया किराए का शिक्षक

मास्टर जी का अनूठा कारनामा : खुद स्कूल जाते नहीं, रख लिया किराए का शिक्षक
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सूरजपुर के ग्राम मोहरसोप में पदस्थ प्रधानपाठक स्वयं स्कूल नहीं आते बल्कि ड्यूटी के लिए 2 हजार रुपए में शिक्षक रखकर स्वयं शासकीय वेतन का घर बैठे लाभ उठा रहे हैं।

अंबिकापुर। सूरजपुर जिले के ओडगी विकासखंड अंतर्गत ग्राम मोहरसोप में पदस्थ प्रधानपाठक स्वयं स्कूल नहीं आते बल्कि अपनी ड्यूटी के लिए 2 हजार रुपए में एक शिक्षक रखकर स्वयं शासकीय वेतन का घर बैठे लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता का अंदाजा स्वयं ही लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत मोहरसोप प्राथमिक शाला में डीएस सिंह की पदस्थापना प्रधान पाठक के रूप में की गई है लेकिन प्रधान पाठक डीएस सिंह महीने में सप्ताह भर भी स्कूल नहीं आते है।

कक्षा पहली से पांचवीं तक वाले विद्यालय में कुल 52 बच्चे अध्ययनरत है लेकिन स्कूल अभी भी एकल शिक्षकीय है। यही वजह है कि प्रधान पाठक ने भी बच्चों की पढ़ाई के लिए किराए पर शिक्षक रख लिया है। प्रधान पाठक द्वारा स्कूल में महज 2 हजार रुपए में शिक्षक रखा गया है और खुद महीने में एक सप्ताह ही स्कूल आते है। प्रधान पाठक की अनुपस्थिति में भृत्य स्कूल खोलकर सफाई करता है जबकि किराए में रखा गया शिक्षक आकर बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा है। पूर्व में एक किराए के शिक्षक द्वारा काम छोड़ने के बाद पिछले 12 दिनों से पूर्व देव यादव नामक युवक बच्चों को पढ़ा रहा है जबकि शासकीय स्कूल में पढ़ाने के लिए उसकी कोई शासकीय नियुक्ति भी नहीं की गई है।

बच्चों ने भी कहा रोज नहीं आते
गुरुवार को स्कूल में 52 में से 11 बच्चे स्कूल में मौजूद थे। इस दौरान बच्चों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि प्रधान पाठक मीटिंग में जाते है तो स्कूल नहीं आते। बाकी समय पूर्व देव यादव द्वारा बच्चों को पढ़ाया जाता है। हैरानी की बात तो यह है क्षेत्र में प्रधान पाठक द्वारा किराए पर शिक्षक रखने की जानकारी ना ही क्षेत्र के संकुल समन्वयक को है और ना ही अधिकारियों को।

की जाएगी कार्रवाई
सूरजपुर के डीईओ अजय मिश्रा ने बताया कि, बीईओ को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए है। सोमवार को जांच प्रतिवेदन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर, मंत्री का नाम नहीं पता
स्कूल में जिस किराए के शिक्षक द्वारा बच्चों को पढ़ाने का काम किया जा रहा था उसने खुद 12वीं तक पढ़ाई करने का दावा किया। किराए के शिक्षक पूर्व देव यादव ने बताया कि प्रधान पाठक ने उसे स्कूल में पढ़ाने के लिए रखा है और वे 11 दिनों से पढ़ा रहा है। उसे कोई नियुक्ति नहीं दी गई है। इस दौरान जब उससे जिले के कलेक्टर, प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री, विधायक, शिक्षा विभाग के बीईओ का नाम पूछा गया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाया। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूरस्थ क्षेत्र में मौजूद एकल शिक्षकीय विद्यालयों में बच्चों के शिक्षा गुणवत्ता का स्तर क्या है।

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