दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन: डब्बाकोंटा में कोया कुटमा समाज की संस्कृति संरक्षण और समाज की एकता पर दिया गया जोर

डब्बाकोंटा में कोया कुटमा समाज का वार्षिक सम्मेलन
लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डब्बाकोंटा में कोया कुटमा आदिवासी समाज का दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। सम्मेलन में सुकमा जिले के तीनों विकासखंडों सहित दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जिससे आयोजन पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में नजर आया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कोया समाज की संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं को सुरक्षित रखना तथा नई पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ना रहा। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि कोया करसाड़ वह परंपरा है, जिसके माध्यम से बच्चे जन्म के बाद खेल-खेल में अपनी संस्कृति, रहन-सहन और सामाजिक नियमों को सीखते हैं।

समस्याओं और चुनौतियों पर की गई चर्चा
सम्मेलन में समाज के संभागीय और जिला स्तर के पदाधिकारी उपस्थित रहे। समाज के सामने आ रही वर्तमान समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई और उनसे मिलकर निपटने पर सहमति बनी। कार्यक्रम को अनुशासित रखने के लिए यह निर्णय लिया गया कि बिना पारंपरिक लूंगी और गमछा के किसी को भी कार्यक्रम स्थल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, नियम तोड़ने पर सामाजिक दंड लगाया जाएगा।

शिक्षा को प्राथमिकता देने और संगठन को मजबूत करने की अपील
इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के जिला पदाधिकारियों ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा और एकता सबसे जरूरी है। उन्होंने समाज के लोगों से शिक्षा को प्राथमिकता देने और संगठन को मजबूत करने की अपील की। कोया करसाड़ को समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताते हुए उन्होंने इसे आगे भी इसी तरह मनाने का संदेश दिया।
