सुकमा में 'बस्तर पंडुम' का आयोजन: 12 विधाओं में दिखी जनजातीय कला की झलक, विजेता प्रतिभागियों को किया गया पुरस्कृत

सुकमा में बस्तर ओलंपिक का शुभारंभ 28 को : 43 हज़ार से अधिक प्रतिभागी हुनर दिखाने को तैयार
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मंच पर बैठे पदाधिकारी 

सुकमा में शुक्रवार को 'बस्तर पंडुम-2026' के अंतर्गत जनपद स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान 12 विधाओं में जनजातीय कला की झलक दिखी।

लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा में शुक्रवार को 'बस्तर पंडुम-2026' के अंतर्गत जनपद स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित इस उत्सव में समूचे क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति जीवंत हो उठी। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर माल्यार्पण और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर के मूल स्वरूप चाहे वह वेशभूषा हो, आभूषण हों या पारंपरिक वाद्य यंत्र को आने वाली पीढ़ी के लिए सहेज कर रखना है। प्रतियोगिता के दौरान कुल 12 अलग-अलग विधाओं में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसमें लोक नृत्य, पारंपरिक गीत, नाट्य कला और शिल्प कला जैसे क्षेत्र शामिल थे। प्रत्येक विधा के प्रथम विजेताओं को 10-10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। अन्य सभी प्रतिभागियों को उनकी कला और उत्साह के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।


हमारी पुरानी संस्कृति ही हमारी पहचान- दीपिका सोरी
मुख्य अतिथि और महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी, जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर, सांसद प्रतिनिधि अरुण सिंह भदौरिया, जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे सहित सभी जनप्रतिनिधियों ने स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए स्थानीय व्यंजनों जैसे माड़िया पेज, लांदा, सल्फी और चापड़ा चटनी की सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्ग से सुंदर बस्तर को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति के संवर्धन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। खान-पान और रहन-सहन ही हमारी पहचान है और इसे जीवित रखना अनिवार्य है।

वरिष्ठ जनप्रतिनिधि ने बस्तर पंडुम की उपयोगिता पर डाला प्रक्साह
वरिष्ठ जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे ने बस्तर पंडुम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज को जोड़ने वाला उत्सव बताया। जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने बस्तर की भाषा शैली और वेशभूषा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फील्ड स्तर पर संस्कृति को समझने और सहेजने का बेहतरीन मौका हैं। विभिन्न समाज के प्रमुखों ने इस आयोजन को सरकार की एक सराहनीय पहल बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। बस्तर पंडुम-2026 ने न केवल स्थानीय कलाकारों को एक मंच प्रदान किया है, बल्कि बस्तर की लुप्त होती परंपराओं को एक नई ऊर्जा और वैश्विक पहचान देने का कार्य भी किया है।


ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर, सांसद प्रतिनिधि अरुण सिंह भदौरिया, जनपद अध्यक्ष कोंटा कुसुमलता कवासी, जनपद अध्यक्ष सुकमा संतोष इडो, उपाध्यक्ष रीना पेद्दी, नगर पालिका उपाध्यक्ष भुवनेश्वरी यादव, जिला पंचायत सदस्य गीता कवासी, जनप्रतिनिधि विश्वराज चौहान, एसडीएम सूरज कश्यप, जनपद सीईओ निधि प्रधान, जनपद सदस्यगण, मांझी, चालकी, पेरमा, समाज प्रमुख तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।




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