हमर अस्पताल का हाल: 24 घंटे खुलना था, लेकिन दोपहर में ही लग रहा ताला

File Photo
रायपुर। सामान्य बीमारी वाले मरीजों का आंबेडकर सहित अन्य बड़े अस्पतालों में दबाव कम करने गली-मोहल्ले में खोले गए हमर क्लीनिक में उपचार व्यवस्था ओपीडी में सिमटकर रह गई है। शुरुआत में चौबीस घंटे और सातों दिन खोले जाने वाले यह प्राथमिक स्तर के स्वास्थ्य केंद्र दोपहर बाद डॉक्टर विहीन हो जाते हैं। कई सेंटरों की स्थिति तो ऐसी होती है कि वहां का नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ताला लगाकर चला जाता है। हमर क्लीनिक में पर्याप्त स्टाफ का अभाव है और वहां काम करने वाले ज्यादातर चिकित्सक बांडेड डॉक्टर हैं।
दिल्ली की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी गली-मोहल्ले में हमर क्लीनिक खोला गया था। इनमें राजधानी रायपुर प्रमुख था। योजना के करीब तीन साल पूरा होने के बाद भी यह क्लीनिक पूरी संख्या में नहीं खुल पाया है। जो खुले हैं उनमें से ज्यादातर अपने उद्देश्य पर खरा नहीं उतर रहे हैं। शुरुआती दिनों में योजना बनाई गई थी कि सामान्य तरह की बीमारियों का इलाज, बीपी-शुगर की जांच और नियमित टीका लगाने वाले इन केंद्रों का संचालन चौबीस घंटे और सातों दिन किया जाएगा। काफी समय बीतने के बाद भी ऐसा होता प्रतीत नहीं हो रहा है। पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग और नहीं हो रहा है।
दोपहर के बाद ज्यादातर डॉक्टर विहीन
पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ नहीं होने की वजह से यहां जांच और इलाज की सुविधा केवल ओपीडी की टाइमिंग यानी सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक ही मिल पा रही है। इसके बाद यहां सेवा देने वाले डॉक्टरों के गायब होने के बाद मरीजों को दवा बांटने की जिम्मेदारी वहां रहने वाले नर्सिंग स्टाफ अथवा पैरामेडिकल कर्मचारियों की हो जाती है और हाल तो ऐसा भी है कि दोपहर बाद यानी शाम होने तक कई स्वास्थ्य केंद्रों में तो ताले लग जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि इन हमर क्लिनिक में पर्याप्त और नियमित स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। यहां सेवा देने वाले ज्यादातर डॉक्टर अनुबंध सेवा वाले होते हैं जो हर साल बदल जाते हैं वहीं ड्यूटी के दौरान भी उनका मुख्य लक्ष्य पढ़ाई का होता है।
आधा दर्जन का सेटअप कहीं पूरा नहीं
सूत्रों के मुताबिक, हमर क्लीनिक में एक डॉक्टर के साथ नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ तथा अन्य का सेटअप है। वास्तव में रायपुर में संचालित होने वाले किसी भी हमर क्लीनिक में पूरा स्टाफ नहीं है। कहीं नर्सिंग स्टाफ का टोटा है, तो कहीं पैरामेडिकल स्टाफ नदारद है। दूसरी ओर कई इलाके में तो हमर क्लीनिक का भवन ही नहीं बन पाया है।
पेंशनबाड़ा
हमर क्लीनिक का संचालन सुबह के वक्त होता है। ओपीडी में काफी संख्या में मरीज आते है मगर दोपहर दो बजे के बाद स्वास्थ्य केंद्र में ताला लग जाता है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां सामान्य बीमारी की दवा सुबह के वक्त ही मिलती है।
छत्तीसगढ़ नगर
टिकरापारा के छत्तीसगढ़ नगर के हमर क्लीनिक में सामान्य बीमारियों के इलाज के साथ नियमित टीकाकरण की सुविधा भी है। यह केंद्र सुबह नौ के बाद खुलता है और दोपहर होने के बाद बंद हो जाता है। क्षेत्र के मरीजों को जरुरत होने पर दूसरे स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है।
मठपारा
मठपारा में प्रारंभ किए गए हमर क्लीनिक में सुबह ओपीडी में काफी भीड़ होती है। मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार दवा मिलती है। दोपहर ओपीडी के बाद यहां भी मामला शांत हो जाता है और मरीजों को दूसरे दिन का इंतजार करना होता है।
शुक्रवारी बाजार
शुक्रवारी बाजार के हमर क्लीनिक का हाल भी कुछ ऐसा ही है। दोपहर दो बजे के बाद यहां का ज्यादातर स्टाफ गायब हो जाता है। जरूरतमंद मरीजों को अपनी समस्या के समाधान के लिए गुढ़ियारी हमर अस्पताल जाना पड़ता है।
