छत्तीसगढ़ की बेटी ने दी 'पंडवानी' की भव्य प्रस्तुति: नागपुर के विजयनगर में तीजन बाई की शिष्या तरुणा साहू ने अपनी प्रस्तुति से बांधा समां

नागपुर में पंडवानी गायिका तरुणा साहू ने दी प्रस्तुति
राजनांदगांव। नागपुर के कलमना विजयनगर में उस समय गूंज उठी जब पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई की शिष्या और सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू ने अपने सशक्त एवं भावपूर्ण प्रदर्शन से समूचे मेला स्थल को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्तमान में रेल सुरक्षा बल (RPF) राजनंदगांव में इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ तरुणा साहू ने 'लोक मंडई- छत्तीसगढ़ संस्कृति' कार्यक्रम के मंच पर महाभारत के दो मार्मिक प्रसंग सुनाए। 'द्रौपदी चीरहरण' और 'शंकर- अर्जुन संवाद' का इतना प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया कि हजारों की संख्या में उपस्थित दर्शकों की आंखें नम हो गईं और हर दिल में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा।
तरुणा साहू बचपन से ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पंडवानी परंपरा को समर्पित रही हैं। मात्र 9 वर्ष की आयु से पंडवानी का अभ्यास और मंचन करते हुए आज वे पूरे भारत में छत्तीसगढ़ी लोककला की सशक्त प्रतिनिधि बन चुकी हैं। उनके गुरुओं में पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई जैसी महान विभूति शामिल हैं, जिनके सान्निध्य में उन्होंने पंडवानी की गहराइयों को आत्मसात किया।

तरुणा साहू ने जगा रखी है अलख
छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार द्वारा फोक एवं ट्रेडिशनल आर्ट में सम्मान एवं स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाली तरुणा साहू न केवल एक समर्पित लोक कला साधक हैं, बल्कि अपनी पुलिस सेवा के दायित्वों का भी अत्यंत निष्ठा से निर्वहन करती हैं। समाज सेवा और संस्कृति–संरक्षण के इस अद्भुत समन्वय ने उन्हें विशिष्ट व्यक्तित्व प्रदान किया है। हाल ही में कलमना विजयनगर के मंच पर उनके प्रदर्शन के दौरान नागपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में बसे छत्तीसगढ़वासी भाव-विह्वल होकर गर्व से भर उठे। सभी ने उन्हें भरपूर आशीर्वाद और स्नेह प्रदान किया तथा भविष्य में भी इसी तरह पंडवानी की मशाल जलाए रखने की शुभकामनाएँ दीं।
भगवान रामलला की प्राण- प्रतिष्ठा पर दी थी प्रस्तुति
इसके पूर्व भी तरुणा साहू ने अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण- प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया है। आज जब लोककलाएँ आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त होने की कगार पर हैं, ऐसे समय में तरुणा साहू अपने सुर, शब्द और संवाद के माध्यम से पंडवानी जैसी अनमोल कला को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प निभा रही हैं। वे सचमुच छत्तीसगढ़ की एक सच्ची सांस्कृतिक दूत हैं। संपूर्ण छत्तीसगढ़वासी उनके इस समर्पण, लगन और प्रतिभा पर गर्व महसूस करते हैं और कामना करते हैं कि वे यूँ ही अपनी लोकधरोहर को जीवंत रखकर विश्वपटल पर छत्तीसगढ़ का मान और गौरव बढ़ाती रहें।

इन कलाकारों की रही भूमिका
उक्त पंडवानी कार्यक्रम में रागी के रूप में तिहार सिंह ध्रुव, बैंजो में हर्ष मेश्राम, तबला वादक नूतन दामले, हारमोनियम में टीकाराम गेंदले और बांसुरी वादन में अर्जुन यादव ने अपनी वाद्य यंत्रों से पंडवानी के माध्यम से तरुणा साहू के साथ महाभारत प्रसंग को जीवंत किया।
