फूलों की जगह चालान की माला: कलेक्टोरेट में बिना सीट बेल्ट-हेलमेट वाले अफसरों का धमाकेदार स्वागत, अब भरना पड़ेगा 500 का जुर्माना

फूलों की जगह चालान की माला
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बिना हेलमेट चालकों पर कार्रवाई करती हुई पुलिस

राजनांदगांव जिले में अब अधिकारीयों पर बिना सीट बेल्ट-हेलमेट अफसरों को 500 का जुर्माना भरना पड़ेगा।

अक्षय साहू- राजनांदगांव। अक्सर कहा जाता है कि, पर उपदेश कुशल बहुतेरे, यानी दूसरों को नियम-कायदे सिखाना आसान है। लेकिन खुद उनका पालन करना मुश्किल। मगर राजनांदगांव में यह कहावत पूरी तरह उलट गई। सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान कलेक्टोरेट परिसर का नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं रहा। जो अधिकारी और कर्मचारी आम जनता को ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाते हैं, वही बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के ऑफिस पहुंचे, तो गेट पर उनका स्वागत फूलों की मालाओं से नहीं, बल्कि 500 रुपये के चालान से हुआ।

यह कार्रवाई जिला कलेक्टर जितेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर हुई। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि, अगर सिस्टम में सुधार लाना है, तो शुरुआत खुद से, यानी कलेक्टोरेट से ही होनी चाहिए। 'अपना सुधार, संसार की सबसे बड़ी सेवा है' - इस पुरानी कहावत को उन्होंने नए अंदाज में चरितार्थ कर दिखाया। इसी मंत्र के साथ ट्रैफिक पुलिस की टीम सुबह-सुबह कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार पर मुस्तैद हो गई। जैसे ही बाइक और कारों में सवार अधिकारी-कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोककर चालान काटना शुरू कर दिया।

पहले खुद को उदाहरण बनाना है जरूरी
बिना हेलमेट वाली बाइक सवारों पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगा, जबकि कारों में सीट बेल्ट न लगाने वालों को 500 रुपये का चालान थमाया गया। कई मामलों में वरिष्ठ अधिकारी भी इस जांच के दायरे में आए, जिससे पूरा परिसर एकबारगी सन्न रह गया। ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि, यह सिर्फ चालान काटने की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संदेश है। जब हम जनता से नियम मानने की अपील करते हैं, तो पहले खुद को उदाहरण बनाना जरूरी है। कलेक्टर साहब के निर्देश पर हमने इस अभियान को कलेक्टोरेट से शुरू किया, ताकि हर कोई समझे कि कानून सबके लिए बराबर है।

इस अभियान में कलेक्टोरेट की यह पहल एक मिसाल
इस घटना से शहर में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। कई लोग इसे सराहनीय कदम बता रहे हैं। क्योंकि इससे साफ संकेत मिलता है कि, प्रशासन अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि अमल भी कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए चल रहे इस अभियान में कलेक्टोरेट की यह पहल एक मिसाल बन गई है। उम्मीद है कि, अन्य विभाग और आम नागरिक भी इससे प्रेरणा लेंगे और नियमों का पालन खुद से शुरू करेंगे।

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