स्व. रामविशाल पांडे का ऐतिहासिक दान: शिक्षा के लिए कर दी बहुमूल्य भूमि दान, उसी जमीन पर 1965 से संचालित है स्कूल

विधायक रोहित साहू
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शिक्षा के क्षेत्र में स्व. रामविशाल पांडे बने महान दानदाता

स्व. रामविशाल पांडे राजिम क्षेत्र के बरोंडा के निवासी थे। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण, पेश कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने।

श्यामकिशोर शर्मा- राजिम। आज के भौतिकवादी युग में जहां लोग अपनी संपत्ति को संजोने में लगे रहते हैं, वहीं समाज में कुछ ऐसे भी विरले व्यक्तित्व होते हैं जो निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं। ऐसे ही महान दानवीर हैं बरोंडा राजिम के स्व रामविशाल पांडे, जिन्होंने राजिम शहर के मेन रोड में अपनी बहुमूल्य और कीमती जमीन को बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कदम उठाया।

स्व श्री पांडे द्वारा दान की गई भूमि पर आज एक विद्यालय संचालित हो रहा है, जहाँ इंग्लिश मीडियम में 486 बच्चे और हिंदी मीडियम में 167 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस विद्यालय ने न केवल आसपास के गांवों बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों के बच्चों को भी ज्ञान की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए यह स्कूल आशा और उज्ज्वल भविष्य की किरण बनकर उभरा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि स्व श्री पांडे ने यह जमीन दान न करते, तो आज अनेक बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते।

उन्होंने यह दान किसी प्रचार या स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित होकर किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज की दशा और दिशा बदली जा सकती है। विद्यालय में न केवल शैक्षणिक शिक्षा दी जा रही है, बल्कि बच्चों के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षकगण भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि यदि यह विद्यालय अस्तित्व में है, तो उसके पीछे स्व श्री पांडे का त्याग और दूरदर्शिता ही सबसे बड़ा कारण है।


ऐसे दानदाता समाज के लिए प्रेरणास्तंभ
क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने स्व श्री पांडे के इस निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि, ऐसे दानदाता समाज के लिए प्रेरणास्तंभ होते हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर अन्य संपन्न लोगों को भी शिक्षा जैसे पुनीत कार्यों में आगे आना चाहिए। निस्संदेह, स्व श्री पांडे का यह महान दान आने वाली पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची संपत्ति जमीन या धन नहीं, बल्कि शिक्षित और संस्कारवान समाज है। उनका यह योगदान क्षेत्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।

विद्यालय के बोर्ड में अपना नाम दर्ज कराने से भी किया इनकार
उन्होंने करोड़ों रुपये मूल्य की अपनी बहुमूल्य जमीन शहर की शैक्षणिक आवश्यकता को देखते हुए दान कर दी, और इससे भी बढ़कर यह कि विद्यालय बोर्ड में अपना नाम दर्ज कराने से भी इंकार कर दिया, क्योंकि वे जनहित को सर्वोपरि मानते थे। जब राजिम क्षेत्र में पूर्ण माध्यमिक शिक्षा की व्यवस्था अत्यंत कमजोर अवस्था में थी और एक विद्यालय की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उस समय जब दान देने से लोग कतराते थे, तब स्व श्री पांडे स्वयं आगे आए और उन्होंने निस्वार्थ भाव से अपनी भूमि शिक्षा के लिए समर्पित कर दी। उनका स्पष्ट विश्वास था कि परहित ही सच्चा धर्म है और इसी भावना के साथ उन्होंने संस्कृत के उक्ति कस्यचित भूषणं दानम को अपने जीवन में चरितार्थ किया।

1965 से निरंतर संचालित है विद्यालय
मालूम हो कि, स्व श्री पांडे के दान से यह विद्यालय 1965 से निरंतर संचालित है। वर्तमान समय में इस परिसर में इंग्लिश मीडियम स्कूल संचालित हो रहा है, जहाँ कक्षा 1 से 12वीं तक 486 विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम में अध्ययनरत हैं, वहीं कक्षा 9वीं से 12वीं तक 160 विद्यार्थी हिंदी माध्यम में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह विद्यालय आज क्षेत्र के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बन चुका है। राम विशाल पांडे के परिवार की अगली पीढ़ी में उनके दो पुत्र- प्रफुल्लचंद पांडे और लोकेश पांडे, तथा दो पुत्रियाँ- स्नेहल तिवारी और उषा शुक्ला हैं।

परिवार के सदस्य बताते हैं कि, नई पीढ़ी को भी अपने दादा और परदादा द्वारा किए गए इस महान दान पर गर्व है, और वे इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी विरासत मानते हैं। निस्संदेह, राम विशाल पांडे का यह त्याग और दूरदर्शिता राजिम क्षेत्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची संपत्ति धन या जमीन नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से गढ़ा गया उज्ज्वल भविष्य है। उनका जीवन आज भी समाज को यह संदेश देता है कि यदि सोच जनहित की हो, तो एक व्यक्ति भी इतिहास रच सकता है।

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