राजिम कुंभ कल्प की तैयारी: मेला 1 फरवरी से, संगम में दो दिन पहले छोड़ा जाएगा पानी

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श्याम किशोर शर्मा- राजिम। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 की तैयारियां अब तेजी से आकार लेने लगी है। मेला 1 फरवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, जो माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलेगा। मेले का आयोजन नए मेला मैदान में किया जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने 54 एकड़ भूमि आरक्षित की है। अभी नदी के हालात बहुत ही खराब है, यहां पानी तो थोड़ा बहुत है मगर प्रवाह नहीं है। नदी में धार मेला शुरू होने के 2 दिन पहले 30 जनवरी को देखने को मिलेगा। इस विशाल परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए करोड़ों रुपए की स्वीकृति दी गई है।
मेला क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता तथा श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता में रखते हुए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। श्रद्धालुओं के लिए संगम में अविरल जलधारा राजिम कुम्भ कल्प मेले की आत्मा माने जाने वाले महानदी, पैरी, सोंदूर संगम में स्नान के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए मेला शुरू होने के ठीक दो दिन पहले सिकासार जलाशय से 30 जनवरी को नदी में पानी छोड़ा जाएगा। यह जलधारा महाशिवरात्रि तक निरंतर प्रवाहित रहेगी।
लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
इस वर्ष संत समागम, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और विविध आयोजन मेले को और आकर्षक बनाएंगे। बता दें कि राजिम विधायक रोहित साहू मेले की भव्यता को लेकर कई बैठकें जिले के अफसरों के साथ कर चुके है। रायपुर कमिश्नर महादेव कावरे, गरियाबंद कलेक्टर बीएस उइके, प्रशासनिक अफसरों के साथ राजिम रेस्ट हाऊस में तीन राउंड का बैठक ले चुके हैं। नवीन मेला मैदान में आज की तारीख में 5 ट्रैक्टर, 1 जेसीबी मैदान को समतल एवं सफाई कार्य में लग चुके हैं। नदी घाट पे लाइटिंग का काम शुरू हो गया है। मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बड़ा मंच बनाया जाएगा। पुलिस के एक हजार जवान मेले में तैनात रहेंगे। पूरा मेला क्षेत्र सीसी टीवी कैमरे से लैस होगा।
तैयारियों पर जोर
जिला मुख्यालय गरियाबंद, धमतरी एवं रायपुर में बैठे विभिन्न विभागों के अफसरों को 45 किमी चलकर दौड़ लगानी पड़ेगी। राजिम का यह सुप्रसिद्ध मेला भगवान श्री राजीव लोचन के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आदिकाल से लगता चला आ रहा है। यह मेला माघ पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है। भगवान श्री राजीव लोचन मंदिर के रंगाई-पोताई का काम साल में एक बार इसी समय होता है। मेले को लेकर राजिम सहित आसपास के सैकड़ों गांव में उत्साह चरम पर है।
