निजी अस्पतालों को मिलने लगा आयुष्मान का पैसा: राज्य शासन ने जारी किए 5 सौ करोड़ रुपये, अनियमित भुगतान पर चिंताग्रस्त निजी हास्पिटल

निजी अस्पतालों को मिलने लगा आयुष्मान का पैसा
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आयुष्मान कार्ड डमी (file image)

शासन द्वारा 500 करोड़ जारी होने से निजी अस्पतालों को राहत मिली, लेकिन आयुष्मान योजना में अनियमित भुगतान, लंबित टीडीएस और प्रोत्साहन राशि पर चिंता बरकरार।

रायपुर। शासन द्वारा पांच सौ करोड़ रिलीज करने के बाद निजी अस्पतालों का आर्थिक संकट दूर होने लगा है, पर निजी अस्पताल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अनियमित भुगतान पर चिंतित हैं। लंबित राशि प्राप्त करने के लिए साल, छह महीने में इलाज बंद करनी की चेतावनी देनी पड़ती है। इससे स्वास्थ्य संबंधी महत्वाकांक्षी योजना के उद्देश्य पर विपरीत असर पड़ता है।

दो दिन पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात के दौरान भुगतान की प्रक्रिया को नियमित करने और नियमों को सरल बनाने की मांग कर चुके हैं। भुगतान नहीं मिलने की वजह से अस्पतालों को होने वाली परेशानी को जानने के बाद मंत्री ने नियमित भुगतान की प्रणाली बनाने का आश्वासन भी दिया है। आईएमए सहित अन्य चिकित्सकीय संगठन योजना अंतर्गत हुए इलाज की राशि का भुगतान अस्पतालों को नहीं होने पर योजना के हितग्राहियों का इलाज बंद करने की चेतावनी दे चुके थे।

भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपए वित्त विभाग की अनुमति
उनके अल्टीमेटम के बाद विभागीय अधिकारी और स्टेट नोडल एजेंसी के अफसर सक्रिय हुए और भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपए वित्त विभाग की अनुमति के बाद अस्पतालों को रिलीज करना शुरू कर दिया है। कुछ अस्पतालों के खाते में राशि पहुंची है, कुछ को बैंक से भुगतान प्राप्त होने मैसेज आने का इंतजार है। चिकित्सकों का तर्क है कि भुगतान होना अच्छी बात है, मगर आए दिन राशि अटकना और इसके लिए जिम्मेदारों के कार्यालयों का चक्कर के साथ उपचार बंद करने का अल्टीमेटम देना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए स्टेट नोडल एजेंसी को नियमित भुगतान के लिए जरूरी व्यवस्था बनानी होगी।

प्रोत्साहन राशि भी अटकी
निजी अस्पतालों को इलाज की राशि का भुगतान हो गया है मगर सरकारी डाक्टरों की प्रोत्साहन राशि की समस्या करीब दो साल से बनी हुई है। मरीजों के इलाज के बदल तमाम चिकित्सकीय स्टाफ को राशि का कुछ हिस्सा प्रोत्साहित करने दिया जाता है। प्रोत्साहन राशि के बंदरबाट का मामला सामने आने के बाद इस पर रोक लगाई गई थी जो पाबंदी अब तक नहीं हटी है।

समस्या से अवगत कराया गया
अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र शुक्ला ने कहा कि, रिलीज हुई पांच सौ करोड़ से अस्पतालों को भुगतान किया जा रहा है। समस्या भुगतान के नियमित नहीं होने की है, इस बार मुलाकात के दौरान स्वास्थ्य मंत्री को भी अवगत कराया गया है। उन्होंने इसमें सुधार किए जाने का आश्वासन दिया है।

टीडीएस की दस फीसदी राशि का नहीं हुआ भुगतान
एएचपीआई अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि, शासन द्वारा दी गई राशि से कुछ अस्पतालों को भुगतान हुआ है। पिछले जनवरी से मार्च की राशि की फाइल अब तक अटकी हुई है। शासन द्वारा वित्तीय वर्ष के टीडीएस की दस फीसदी राशि का भुगतान नहीं हुआ है, जिसकी वजह से कुछ अस्पतालों को इंकम टैक्स का नोटिस मिला है।

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