भूपेश पहुंचे जेल: लखमा से मिले, भाजपाइयों पर किया पलटवार, बोले- मैं बेटे को छुड़ा सकता तो जेल जाने ही क्यों देता

भूपेश पहुंचे जेल : पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से की मुलाकात, बोले- बीजेपी के लोग सच कह रहे, निर्दोष को एक साल से रखा है बंद
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कवासी लखमा से मिलने जेल पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश बघेल  

शराब घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मिलने के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल रायपुर सेन्ट्रल जेल पहुंचे।

रायपुर। शराब घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मिलने के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल रायपुर सेन्ट्रल जेल पहुंचे। जहां उन्होंने पिछले एक साल से जेल में बंद कवासी लखमा से मुलाकात की। शराब घोटाले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से वे जेल में बंद हैं।

मुलाकात के बाद पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि, BJP के मंत्री नेता आज गलती से सच बोल रहे हैं। निर्दोष लखमा को 1 साल ED EOW ने जेल में बंद किया हुआ है। BJP के नेता भी इस बात को मान रहे है। सवाल यह है तो कार्रवाई क्यों? FIR क्यों? कुछ बोलते हैं कि बेटे को छुड़ा लिया। अगर मेरा चलता तो वह जेल क्यों जाता? ED ने कवासी लखमा रिप्लाई फाइल ही नहीं किया है। बीजेपी के लोग घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें।

बीजेपी ने उठाए सवाल
उल्लेखनीय है कि, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल बीते दिन रिहा हो गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सत्यमेव जयते के पोस्टर लगाए थे। जिसके बाद बीजेपी ने प्रश्न पूछा था कि, शराब घोटाले जैसे गंभीर मामले में भूपेश के बेटे को जमानत मिल जाती है, लेकिन उसी केस में पूर्व मंत्री कवासी लखमा अभी भी जेल में हैं। भूपेश ने लखमा की पूछपरख नहीं की। कांग्रेस सरकार के दौरान चुनिंदा नेताओं को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया। लखमा को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उनके अनपढ़ होने का फायदा उठाकर उनके खिलाफ साजिश रची गई। अगर जांच निष्पक्ष है तो फिर बेटे को राहत और आदिवासी नेता अभी तक सलाखों के पीछे क्यों हैं?

16 जनवरी को हुई थी लखमा की गिरफ्तारी
आपको बता दें कि, 16 जनवरी को शराब घोटाला केस में ED ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। वे ED दफ्तर पूछताछ के लिए पहुंचे थे। कोर्ट ने उन्हें 7 दिन के लिए ED की रिमांड में भेज दिया था। वहीं ED के वकील सौरभ पांडेय ने दावा किया है कि, कवासी लखमा को हर महीने दो करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर दिए जाते थे।

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