छत्तीसगढ़ के 25 साल पर संगोष्ठी: दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय में दो दिन का आयोजन

राष्ट्रीय संगोष्ठी में आए मुख्य अतिथिगण
रायपुर। शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य विभाग द्वारा 5 एवं 6 जनवरी 2026 को द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'छत्तीसगढ़ @ 25 : उपलब्धियां, चुनौतियां एवं भावी संभावनाएं' का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. संतोष कुमार देवांगन, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्थापना के 25 वर्षों में शिक्षा, उद्योग और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने डिग्री के लिए नहीं बल्कि स्किल सीखने के लिए युवाओं को प्रोत्साहन दिया एवं शिक्षण संस्थानों से राज्य के समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने डिजिटल वर्क,टीम वर्क, बहुविषयक शिक्षा,डिजिटल मार्केटिंग इको टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने परिभाषाओं को पुनर्भाषित करने कहा। कार्यक्रम के विशेष अतिथि प्रवीण शुक्ला, अपर संचालक, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड, रायपुर ने कहा कि, छत्तीसगढ़ निवेश और औद्योगिक संभावनाओं की दृष्टि से एक उभरता हुआ राज्य है। उन्होंने कहा कि प्रैक्टिकल नॉलेज को बढ़ाने की आवश्यकता है अकादमी को इंडस्ट्री से जोड़ना होगा। उन्होंने राज्य में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठियाँ अकादमिक विमर्श को सशक्त बनाती हैं : डॉ. किरण गजपाल
संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए विद्वानों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. किरण गजपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसी राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ अकादमिक विमर्श को सशक्त बनाती हैं और विद्यार्थियों में शोध प्रवृत्ति का विकास करती हैं। अतिरिक्त संचालक डॉ तपेश चंद्र गुप्ता उद्घाटन सत्र में मंच पर उपस्थित हुए। कार्यक्रम का परिचय संयोजक डॉ प्रीति कंसारा ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ रितु मारवाह ने दिया।
डॉ. विजय कुमार दीक्षित ने रखे विचार
कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. विजय कुमार दीक्षित, सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विषय से जुड़े समकालीन पक्षों पर प्रकाश डालते हुए शोधार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके पश्चात आयोजित द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. रक्षा सिंह, विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) ने व्याख्यान दिया। उन्होंने आर्थिक एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य में विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
शशांक शर्मा का संबोधन
दिन के तृतीय तकनीकी सत्र में शशांक शर्मा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी ने अपने उद्बोधन में साहित्य, समाज और समकालीन चेतना के अंतर्संबंधों पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। आयोजन समिति के सदस्य डॉ अनिता दीक्षित, डॉ. कीर्ति श्रीवास, डॉ मुक्ता मल्होत्रा ने सभी तकनीकी सत्रों में उद्बोधन दिए। डॉ. नेहा दुबे, मुस्कान श्रीवास्तव, भारती कुमेठी, डॉ. आरती उपाध्याय, कार्तिक पटेल अतिथि व्याख्याता, कौशल सोनी वर्मा, वृंदावती नायक, डी रवि, रूपाली कौशल आदि शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। समापन 6 जनवरी 2026 को विभिन्न सत्रों एवं निष्कर्षात्मक चर्चा के साथ किया जाएगा।
