कमिश्नरी लागू करने के तरीके पर पुलिस में नाराजगी: अंदर चल रही खींचतान- संसाधन कौन देगा, मुख्यालय या सरकार ?

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पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़

पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने को लेकर अब अंदरखाने से ही नाराजगी की खबरें आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कमिश्नरी के गठन के लिए संसाधन कौन देगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार रायपुर के नगरीय क्षेत्र में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने के तौर-तरीके को लेकर अब अंदरखाने से ही नाराजगी की खबरें आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कमिश्नरी के गठन के लिए संसाधन कौन देगा। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें, तो पुलिस मुख्यालय ने कह दिया है कि संसाधन पुलिस विभाग नहीं, सरकार देगी। इस संबंध में आदेश जारी होने की सूचना है. लेकिन फिलहाल उसका ब्योरा नहीं मिल पाया है।

ये है मामला
रायपुर के नगरीय इलाकों के 21 थाना क्षेत्रों में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू हो गई है। इसके साथ ही क्षेत्राधिकार का विभाजन भी हो गया है। नगरीय क्षेत्र जो पहले रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के कार्यक्षेत्र का हिस्सा था, अब यह हिस्सा कमिश्नर के क्षेत्राधिकार में आ गया है। यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि कमिश्नरी के गठन के लिए संसाधन कौन देगा। इस मामले को लेकर पुलिस विभाग के एक आदेश के बाद खींचतान बढ़ती दिख रही है।

संसाधन देने से किया इंकार
सूत्रों के अनुसार जब कमिश्नरी के लिए संसाधन देने की बात सामने आई तो पुलिस विभाग ने कमिश्नरी के लिए कोई भी संसाधन देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि विभाग रेंज के लिए संसाधन देता है, कमिश्नरी को संसाधन नहीं दिया जाएगा। यह जिम्मा सरकार का है। इससे साफ होता है कि कमिश्नरी को लेकर पहला विवाद संसाधन को लेकर ही सामने आ रहा है।

अधिकारों को लेकर भी टकराव
कमिश्नरी प्रणाली को लेकर टकराव की एक अन्य जानकारी के मुताबित आईपीएस और आईएएस अधिकारियों के बीच अधिकारों को लेकर भी विवाद की स्थिति है। दरअसल पुलिस कमिश्नर को जो दंडाधिकारीय अधिकार दिए गए हैं, वे आईएएस अधिकारी को कलेक्टर के रूप में पूर्व से ही दिए गए थे। इसमें अब कटौती कर कमिश्नर यानी आईपीएस के हिस्से में आए हैं। इस विवाद को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच के रूप में देखा जा रहा है।

नवा रायपुर को शामिल न करने पर भी विवाद
कमिश्ररी के गठन की अधिसूचना आने के समय ही साफ हो पाया कि नवा रायपुर क्षेत्र कमिश्नरी के दायरे में नहीं आएगा। इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या कारण है कि नवा रायपुर जैसे राज्य के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को कमिश्नरी से अलग रखकर रायपुर जिले के ग्रामीण हिस्से में शामिल किया गया है।

जानकार बताते हैं कि नवा रायपुर को कमिश्नरी से अलग रखने को लेकर सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे है। क्योंकि नवा रायपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री, मंत्रियों के आवास सहित विधानसभा, मंत्रालय, सचिवालय, विभागाध्यक्ष भवन से लेकर पुलिस मुख्यालय और कई अन्य विभागों के मुख्यालय हैं। यहां की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी रायपुर जिला ग्रामीण पुलिस के जिम्मे दी गई है।

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