दांतों में महंगाई का दर्द: सोना बंद, चांदी भरना चार गुना महंगा, सरकारी अस्पताल में राहत क्योंकि यहां सालभर का स्टॉक

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रुचि वर्मा- रायपुर। सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने के बाद आपको अपने दांतों का अतिरिक्त ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि इसका इलाज अब महंगा हो गया है। दरअसल, दांत के सड़े हुए हिस्सों को निकालने के बाद वहां पर चांदी भरी जाती रही है। दांतों के फीलिंग मटेरियल के रूप में चांदी का इस्तेमाल पहले से होता रहा है। पहले जहां एक दांत में चांदी भरने में 500 से 700 रुपए तक का खर्च आकार के अनुसार आता था, तो अब वहीं खर्च चार गुना होकर 2,000 से 2,800 रुपए तक पहुंच गया है।
चांदी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अब चांदी की जगह मिश्रित धातु का प्रयोग इलाज के लिए हो रहा है। वहीं सोने की जगह कास्ट मेटल का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें सिल्वर व कास्ट गोल्ड का प्रयोग होता है। मजबूती के लिए सेरेमिक मटेरियल भी प्रयोग में लाए जा रहे हैं।
दाम बढ़ने से पहले ही खरीदी
शासकीय दंत महाविद्यालय व चिकित्सालय प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र वाढेर ने बताया कि, सोने-चांदी के दाम बढ़ने से दांतों का इलाज महंगा हुआ है, लेकिन शासकीय दंत चिकित्सालय में सालभर का स्टॉक है। चांदी के दाम बढ़ने के पूर्व ही हमने इसकी खरीदी कर ली थी, इसलिए हम प्रभावरहित हैं।
सरकारी मरीजों का अस्पताल
निजी अस्पताल में इलाज कराने वालों को पहले की तुलना में जेब अधिक ढीली करनी पड़ रही है। सोने-चांदी के अलावा अन्य मिश्रित धातुओं की कीमतें भी बढ़ी हैं। वहीं, शासकीय दंत चिकित्सालयों में इलाज करा रहे मरीज राहत की सांस ले रहे हैं, क्योंकि यहां कीमतें जस की तस हैं। राजधानी के शासकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में इलाज के दौरान सोने का प्रयोग नहीं होता है, लेकिन फिलिंग के लिए केस की आवश्यकतानुसार चांदी प्रयोग में लाई जाती है। चांदी की कीमतें बढ़ने के पहले ही यहां सालभर का स्टॉक खरीदकर रख लिया गया था। अब चांदी खत्म होने के बाद ही दोबारा खरीदी होगी।
सोने के दांत बनना दशकभर पहले ही बंद
एक समय था जब लोग दांत गिर जाने पर या किसी दांत के सड़ जाने पर उसके स्थान पर सोने के दांत लगवाना पसंद करते थे। यह एक तरह से सोशल स्टेट्स का भी मामला था और फैशन का भी। लेकिन शहर के दंत चिकित्सकों की मानें तो सोने की कीमतें बढ़ने के साथ ही इसका चलन धीरे-धीरे कम होना प्रारंभ हो गया। लगभग दशकभर पहले से सोने के दांत बनाए जाना लगभग बंद हो गए हैं। बीते वर्ष तक अपवादस्वरूप एकाध मामले ही सामने आए जहां लोगों को सोने की कैप या इस तरह की चीजें लगानी थी। लेकिन हाल के महीनों में इस तरह की ख्वाहिश किसी भी मरीज ने जाहिर नहीं की है। ऐसा सोने की आसमान छू रही कीमतों के कारण है।
