रायपुर में टी-20 मैच 23 जनवरी को: छत्तीसगढ़ की मिट्टी से ही बनी पिच, चौके- छक्के की होगी बरसात

रायपुर में वनडे मैच 23 जनवरी को : छत्तीसगढ़ की मिट्टी से ही बनी पिच , चौके- छक्के की होगी बरसात
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शहीद वीर नारायण स्टेडियम

टी-20 मैच को लेकर शहीद वीर नारायण स्टेडियम में तैयारियां तेज हो चुकी है। 23 जनवरी को भारत और न्यूजीलैंड टी-20 मैच में छत्तीसगढ़ की मिट्टी से पिच बनाई गई थी।

रायपुर। टी-20 मैच को लेकर शहीद वीर नारायण स्टेडियम में क्रिकेट की तैयारियां तेज हो चुकी है। 23 जनवरी को भारत और न्यूजीलैंड टी-20 मैच में छत्तीसगढ़ की मिट्टी से पिच बनाई गई थी। उस मैंच में दर्शकों को खूब आनंद आया था। इस बार भी टी-20 में छत्तीसगढ़ महतारी की मिट्टी से पिच बनाई जा रही है। छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ और एक्सपर्ट ने हरिभूमि को बताया कि पिच का निर्माण छत्तीसगढ़ की मिट्टी से होगा, जिसमें भारत और न्यूजीलैंड के खिलाड़ी खेलेंगे। दिसंबर में हुए वनडे मैच में भी काली मिट्टी का इस्तेमाल हुआ, जिससे भारत को पहले बल्लेबाजी में काफी फायदा हुआ था।

विराट और रितुराज गायकवाड़ ने शतकीय पारी खेली थी। इस बार ऐसा ही मैंच दर्शकों को देखने मिल सकता है। एक्सपर्ट की माने तो पिच दो तरह की बनती है, पहली लाल और काली मिट्टी से। रायपुर में काली मिट्टी की पिच होने से बल्लेबाज को ज्यादा फायदा होगा। छत्तीसगढ़ की लाल मिट्टी में स्वाभाविक रूप से कड़ापन होता है। इससे पिच पर टू बाउंस मिलता है। गेंद टप्पा खाने के बाद तेजी से और अच्छे उछाल के साथ निकलती है। भारतीय तेज गेंदबाज जैसे जसप्रीत बुमराह या अर्शदीप सिंह इस उछाल का फायदा उठाकर कीवी बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेल सकते हैं।

पिच 200 से अधिक स्कोर बनाने में मदद करेगी
छत्तीसगढ़ की काली मिट्टी के पिच में इस बार जो पहले बल्लेबाजी करने उतरेगा उसे फायदा होगा। एक्सपर्ट का कहना है कि काली मिट्टी में गेंद पिच पर फंसती नहीं है और सीधे बल्ले पर आती है, बल्लेबाजों को शॉट खेलने में बहुत आसानी होती है। गेंद की गति का इस्तेमाल करते हुए खिलाड़ी बड़े शॉट आसानी से लगा सकेंगे। रायपुर का मैदान बड़ा है, लेकिन पिच की रफ्तार बड़े स्कोर 180 से 200 से अधिक बनाने में मदद करेगी। अगर ओस अधिक पड़ी तो दूसरी इनिंग में बल्लेबाजों को समस्या हो सकती है।

दूसरी पारी में भी पिंच पहले की तरह काम करेगी
पिच एक्सपर्ट का कहना कि, स्थानीय मिट्टी की बाइंडिंग क्षमता अच्छी होती है। पूरे 40 ओवर के खेल के दौरान पिच टूटेगी नहीं। इसलिए दूसरी पारी में भी पिच का व्यवहार वैसा ही रहेगा जैसा पहली पारी में था। इससे टॉस का असर थोड़ा कम हो जाता है और मुकाबला बराबरी का रहता है। रायपुर में जनवरी की शाम को ओस एक बड़ा मिट्टी फैक्टर होती है। स्थानीय पानी को अच्छे से सोखने की क्षमता रखती है, जिससे अगर हल्की ओस गिरती भी है, तो पिच गीली होकर धीमी नहीं पड़ती और खेल की गति बनी रहती है।

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