नक्सली कमांडर देवा ने कहा: मैंने सरेंडर नहीं किया, हिड़मा को भी फर्जी मुठभेड़ में मारा

नक्सली कमांडर देवा ने कहा : मैंने सरेंडर नहीं किया, हिड़मा को भी फर्जी मुठभेड़ में मारा
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नक्सली कमांडर बारसे देवा 

चार दिन पूर्व हैदराबाद में नक्सल संगठन के बटालियन चीफ बारसे देवा के समर्पण की कहानी को बारसे देवा ने ही नकार दिया है।

जगदलपुर। चार दिन पूर्व हैदराबाद में नक्सल संगठन के बटालियन चीफ बारसे देवा के समर्पण की कहानी को बारसे देवा ने ही नकार दिया है। तेलगांना पुलिस के सामने ही. पत्रकारों से चर्चा में हरिभूमि फॉ बारसे देवा ने कहा कि मैंने समर्पण नहीं किया है। मुझे छग-तेलगांना बार्डर से जाने के दौरान गिरफ्तार किया गया था और चार दिन तक पूछताछ करने के बाद समर्पण शो किया गया। समर्पण के दौरान ही बारसे देवा ने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कई मामलों का खुलासा करते हुए स्वयं के सरेंडर की पूरी कहानी बयां करते हुए बताया कि वह सरेंडर करने के लिए जंगल से बाहर नहीं निकला था,चल्कि संगठन के किसी करने के लिए जंगल से बाहर नहीं निकला था, काम के सिलसिले में 29 दिसंबर को बोलेरो वाहन में सवार होकर अपने साथियों के साथ तेलगांना जा रहा थी, तभी तेलगांना पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। चार दिन तक पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसने दोहराया कि हम सरेंडर करने के लिए जंगल से नहीं आए थे, बल्कि धोखे से हम फंस गए।

पुलिस हमें हैदराबाद लेकर आई और 3 जनवरी को सरेंडर करवा दिया गया। सरेंडर से पहले एक माह तक वह अपने साथियों के साथ छग-तेलगांना बार्डर में सुरक्षित स्थान में रह रहे थे। गौरतलब है कि 3 जनवरी को तेलंगाना स्टेट के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष हैदराबाद में बटालियन नंबर 1 का कमाण्डर इन चीफ बारसे देवा ने अपने 19 साथियों के साथ सरेंडर किया था। इसी समर्पण स्थल से ही उसने अपने समर्पण की कहानी का झूठा बताया था। उसने अपने सपर्मण के लिए तेलगांना पुलिस को संदेश भिजवाने की खबर को गलत बताते हुए कहा है कि पुलिस ने धोखे से फंसाकर समर्पण करवाया है।

विदेशों से नहीं मिलते हथियार
देवा ने बताया कि हमें विदेश से कोई हथियार नहीं मिलता है। समर्पण के दौरान दिए गए हथियारों में शामिल इजराइल मेड वेपन तावोर व अमेरिकन मेड राइफल कॉल्ट एम 4 के संबंध में उसने बताया कि यह हथियार फोर्स रखती है, जिसे हमने हमले के दौरान कई हथियार लूटे हुए थे. उसमें यह भी शामिल था। उसने कहा कि मैं अपनी बटालियन के साथियों के लिए कोई संदेश नहीं साथियों के लिए कोई संदेश नहीं देना चाहता वे आना चाहे तो आए मैं कुछ कह नहीं सकता। उसने बताया कि बटालियन में हम 15 साल से ऊपर के लड़कों को ही भर्ती करते थे। उन्हें जबरदस्ती भर्ती नहीं करते थे। मैं जनता की समस्याओं व नक्सल विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में शामिल हुआ था। उसने कहा कि वर्तमान में समाज प्रमुखों और जनता को कहने के लिए मेरे पास अभी कुछ नहीं है।

इलाज के लिए जाने के दौरान पकड़कर पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मारा, कुजांम का आरोप गलत
साथियों के लिए कोई संदेश नहीं देना चाहता वे आना चाहे तो आए मैं कुछ कह नहीं सकता। उसने बताया कि बटालियन में हम 15 साल से ऊपर के लड़कों को ही भर्ती करते थे। उन्हें जबरदस्ती भर्ती नहीं करते थे। मैं जनता की समस्याओं व नक्सल विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में शामिल हुआ था। उसने कहा कि वर्तमान में समाज प्रमुखों और जनता को कहने के लिए मेरे पास अभी कुछ नहीं है। के लिए जा रहे थे। वहीं उन्हें पकड़कर मारा गया। मनीष कुंजाम का आरोप है कि हिड़मा को देवजी ने मरवाया है ये आरोप गलत है हिड़मा को पुलिस ने ही मारा है। उसने बताया कि 27 अक्टूबर तक हिड़मा और मैं संपर्क में थे। अप्रैल के महीने में हम करेंगुट्टा में थे। हमने सोचा था कि पुलिस का एक-दो दिन का ऑपरेशन होगा। लेकिन इतना बड़ा ऑपरेशन चलेगा ये हमने भी नहीं सोचा था। सुबह साढ़े 6 बजे से हमला शुरू हुआ। तब मैं करेंगुट्टा की पहाड़ी पर था। वहां से सारे बड़े नेताओं को मैंने अलग-अलग इलाकों में बाहर निकाल दिया था। उस समय तक पहाड़ी पर मुठभेड़ में हमारा एक भी साथी नहीं मरा था, इसके बाद पहाड़ी पर पुलिस ने हमारे 36 साथियों को पकड़कर मारा था।

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