धान नहीं बेच पाए किसान हुए एकजुट: ओडिशा सीमा से लगते बोराई गांव पहुंचे अफसर, तत्काल टोकन देने का आदेश

धान नहीं बेच पाए किसान हुए एकजुट
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नारेबाजी करते हुए सभी किसान

नगरी के धान खरीदी केंद्र में किसानों ने धान नहीं बिकने पर हड़कंप मचा दिया। जिसके बाद प्रशासन ने 42 किसानों को टोकन काटने का तत्काल आश्वासन दिया।

अंगेश हिरवानी- नगरी। छत्तीसगढ़ के नगरी विकासखंड केएक धान खरीदी केंद्र में हड़कंप मच गया। दरअसल, धान खरीदी से वंचित दर्जनों किसान आत्मदाह का निर्णय लेकर एकत्र हो गए। महीनों की मेहनत से उपजाया गया धान घरों में पड़ा था, लेकिन टोकन न कट पाने के कारण किसान उसे बेच नहीं पा रहे थे। जिसके बाद किसानों ने सख्त निर्णय लिया और प्रशासन ने सभी 42 किसानों के धान की खरीदी के लिए टोकन काटने का तत्काल आश्वासन दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के सिहावा विधान सभा क्षेत्र के नगरी विकासखंड के सुदूर अंचल और उड़ीसा बार्डर सीमा से लगे बोराई क्षेत्र का है। जहां धान खरीदी केंद्र घुटकेल में उस समय हड़कंप मच गया, जब धान खरीदी से वंचित दर्जनों किसान आत्मदाह का निर्णय लेकर एकत्र हो गए। महीनों की मेहनत से उपजाया गया धान घरों में पड़ा था, लेकिन टोकन न कट पाने के कारण किसान उसे बेच नहीं पा रहे थे।

किसानों के लिए असहनीय होती जा रही स्थिति
क्षेत्र के किसान नेता मनोज साक्षी बीरेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों ने बताया कि, उन्होंने कई बार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाए, आवेदन दिए, गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। आर्थिक तंगी और कर्ज़ के बोझ तले दबे किसानों के लिए यह स्थिति असहनीय होती जा रही थी।

धान नहीं बिकने पर किसान करेंगे आत्मदाह
आख़िरकार मजबूरी में किसानों ने यह कठोर निर्णय लिया कि, यदि उनका धान नहीं खरीदा गया तो वे आत्मदाह करेंगे। जैसे ही यह सूचना प्रशासन तक पहुँची, अधिकारी तत्काल हरकत में आए और मौके पर पहुँचे। जहाँ किसान जीवन और मौत के बीच खड़े थे, वहीं बोराई थाना पुलिस प्रशासन के साथ बेलरगांव तहसीलदार घुटकेल धान खरीदी केंद्र पहुंचे और किसानों से बीच सीधी बातचीत की। बातचीत में सामने आया कि, कुल 42 किसान ऐसे हैं, जिनका न तो टोकन कटा था और न ही धान खरीदा गया।

प्रशासन ने सभी 42 किसानों के टोकन काटने का तत्काल दिया आश्वासन
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन ने सभी 42 किसानों के धान की खरीदी के लिए टोकन काटने का तत्काल आश्वासन दिया। आश्वासन मिलते ही किसानों ने आत्मघाती कदम से पीछे हटते हुए राहत की सांस ली। समय रहते प्रशासन की सक्रियता से एक बड़ी त्रासदी टल गई। वर्तमान में संबंधित किसानों के धान विक्रय के लिए टोकन काटने की प्रक्रिया जारी है। यह घटना एक बार फिर बताती है कि, छोटी प्रशासनिक लापरवाही कैसे किसानों को बड़े कदम उठाने पर मजबूर कर सकती है।

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