गमगीन हुआ कंदाडी गांव: एक साथ उठी दो युवाओं की अर्थी, परिवार सदमे में

सेवन चिराम और फकीर खरे
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सेवन चिराम और फकीर खरे की सड़क हादसे में मौत 

मोहला क्षेत्र के कंदाडी गांव में नए साल का पहला दिन ही बुरी खबर लेकर आया। दो युवा सड़क हादसे का शिकार बन गए।

एनिशपुरी गोस्वामी- मोहला। नव वर्ष 2026 की शुरुआत जहां खुशियों, जश्न और उम्मीदों के साथ होनी थी, वहीं मोहला विकासखंड के ग्राम कंदाडी में नया साल आंसुओं और सिसकियों के साथ हुई। एक ही गांव के दो नवयुवकों की अर्थियां जब एक साथ उठीं और शमशान में दोनो चिताएं एक साथ जलीं, तो पूरा गांव गमगीन हो उठा। हर आंख नम थी और हर घर में मातम पसरा हुआ था।

ग्राम कंदाडी निवासी मोहला आईटीआई के छात्र सेवन चिराम (22) और फकीर खरे (22) की सड़क हादसे में असामयिक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। नया साल मनाने के बाद जब दोनों युवक घर लौट रहे थे, तब मेटेपार गांव के पास हाईवे पर खड़ी एक ब्रेकडाउन ट्रक उनके लिए काल बन गई। हादसे की भयावहता इतनी थी कि दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

खराब पड़े ट्रक से टकराई बाइक
1 जनवरी को लगभग शाम 7:30 बजे मेटेपार गांव मे बीते दो दिनों से भिलाई से सरिया लेकर हैदराबाद के लिए निकली 14 चक्का की ट्रक सीजी 07 b07968 इंजन का हेड खराब होने के कारण ब्रेकडाउन अवस्था में सड़क पर खड़ी हुई थी। इधर मोहला विकासखंड के ग्राम कंदाडी निवासी मोहला आईटीआई के दोनो छात्र सुपर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 08 ए एच 4943 से उक्त खड़ी ट्रक में जा घुसे इस हादसे में दोनों युवाओं कि घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बताया गया कि दोनों युवक गांव से खरखरा बांध पिकनिक के लिए निकले हुए थे वापसी के दौरान तेज रफ्तार मोटरसाइकिल सवार मेटेपार गांव में खडी ट्रक में जा घुसे इस हादसे मे घटना स्थल पर ही दोनों युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल थाना प्रभारी अश्वनी राठौर की टीम मौके पर पहुंचकर दोनों युवाओं के शव को घटना स्थल से उठाकर अंबागढ़ चौकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाते हुए परिजनों को खबर किया।

एक साथ उठी दोनों युवाओं का अर्थी
सुबह जब दोनों का शव गांव पहुंचा, तो खुशियों से सजा गांव अचानक शोकसभा में तब्दील हो गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था, बहनों की चीत्कार और बुजुर्गों की आंखों से बहते आंसू गांव की पीड़ा बयां कर रहे थे। अंतिम संस्कार के दौरान जब दोनों चिताएं एक साथ जलीं, तो ऐसा लगा मानो पूरे गांव की खुशियां उसी आग में भस्म हो गई हों। मातम में गांव-ग्रामीणों का कहना है कि नव वर्ष की यह रात गांव के इतिहास में सबसे दर्दनाक रात बन गई। लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए, लेकिन हर कोई इस सवाल से जूझ रहा था कि आखिर कब तक सड़कें ऐसे ही युवाओं की जान लेती रहेंगी।

आस पास के गांवों में भी शोक का माहौल
इस हृदयविदारक घटना से न केवल कंदाडी, बल्कि आसपास के गांवों में भी शोक की लहर है। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन से हाईवे पर खड़े भारी वाहनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की मांग की है। नया साल जो उम्मीदों और सपनों का प्रतीक होता है, कंदाडी गांव के लिए वह अपूरणीय पीड़ा लेकर आया—जहां एक साथ जलती दो चिताएं आज भी लोगों के दिलों में सुलगती हुई याद बनकर रह गई हैं।

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