सरकारी सिस्टम की बड़ी चूक: ज़िंदा बुजुर्ग महिलाएँ घोषित कर दी गईं मृत, महीनों तक राशन और पेंशन से रहीं वंचित

राशन लेती हुई बुजुर्ग महिला
राहुल यादव- लोरमी। सरकारी रिकॉर्ड की एक गंभीर लापरवाही ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। दरअसल, लोरमी क्षेत्र में दो बुजुर्ग आदिवासी महिलाएं सहबीन बैगा (70 वर्ष, खुड़िया) और सूरजबाई (बंधवा) कागजों में मृत घोषित कर दी गईं, जबकि वे आज भी जीवित हैं और जीवन की बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रही थीं। इस प्रशासनिक भूल के चलते दोनों महिलाओं का महीनों तक राशन और सरकारी लाभ बंद रहा।
गौरतलब है कि, खुड़िया गांव की सहबीन बैगा को पिछले चार महीनों से एक दाना राशन नहीं मिला। मजबूरी में वे गांव वालों से चावल मांगकर गुज़ारा कर रही थीं। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला उजागर होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और आज उनके घर दो बोरी चावल और नमक पहुंचाया गया।
लोरमी में सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां सहबीन बैगा और सूरजबाई को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। महीनों तक राशन और पेंशन नहीं मिली। @MungeliDist #Chhattisgarh pic.twitter.com/aVDHDQmbmO
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) January 11, 2026

वृद्धा पेंशन भी हो गई थी बंद
वहीं बंधवा गांव की सूरजबाई का नाम ऑनलाइन रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने से उन्हें न सिर्फ राशन से वंचित रहना पड़ा, बल्कि वृद्धा पेंशन भी बंद हो गई। आर्थिक तंगी में जीवनयापन करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया। इतना ही नहीं, सहबीन बैगा की दोनों बेटियां भी अब तक विधवा पेंशन और महतारी वंदन योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं, जिससे पूरा परिवार सरकारी सहायता से वंचित है।

सुधार की प्रक्रिया जारी
इस मामले पर एसडीएम अजीत पुजारी ने बताया कि, खुड़िया की सहबीन बैगा का राशन दोबारा शुरू कर दिया गया है, जबकि सूरजबाई के दस्तावेजों में सुधार की प्रक्रिया जारी है।
