प्रधानमंत्री सूक्ष्म स्वरोजगार योजना ने बदली अंजना की किस्मत: नौकरी छोड़कर बनाना शुरू किया ईंट, सालाना लाखों रुपये की कर रहीं हैं कमाई

अंजना औरांव
कमालुद्दीन अंसारी- कोरिया। कहते हैं किस्मत कब और कहां से बदल जाए, कोई नहीं जानता। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की एक आदिवासी महिला की ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही बदली, जब कचरे में मिले एक फटे कागज ने उसकी तकदीर का रास्ता खोल दिया। अंजना औरांव कभी पंचायत कार्यालय में पार्ट-टाइम डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम करती थीं। महीने की महज़ चार हज़ार रुपये की आमदनी में परिवार चलाना उनके लिए बेहद मुश्किल था।
साल 2017 में पंचायत कार्यालय के बाहर कचरे के ढेर में पड़े एक फटे कागज ने अंजना की सोच बदल दी। उस कागज पर ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म स्वरोजगार योजना’ की जानकारी लिखी थी। यहीं से अंजना ने नौकरी छोड़ खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। जिला उद्योग केंद्र के मार्गदर्शन में अंजना ने फ्लाई ऐश ईंट यूनिट लगाने की योजना बनाई। बैंक से करीब 30 लाख रुपये का लोन लेकर उन्होंने ईंट निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआत में परेशानियां आईं, लेकिन अंजना डटी रहीं।
कोरिया जिले अंजना औरांव नौकरी छोड़कर ईंट निर्माण का काम शुरू किया। इससे वे सालाना 6 से 7 लाख रुपये कमातीं हैं। उनकी कहानी आत्मनिर्भरता की जीता- जागता उदाहरण है। pic.twitter.com/0yXoVKcLIz
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) February 1, 2026
रोजाना बनतीं हैं 15 हजार ईंटे
साल 2025 में ‘अंजना एंटरप्राइजेज’ की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे ईंटों की मांग बढ़ी और आज हर महीने करीब 60 हजार रुपये की किस्त समय पर चुका रही हैं। अब अंजना रोज़ाना करीब 15 हजार ईंटों का निर्माण कर रही हैं। आज अंजना की सालाना आमदनी 6 से 7 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। एक वक्त में चार हजार रुपये कमाने वाली अंजना अब आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और उनकी कहानी दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
कोरिया जिले अंजना औरांव नौकरी छोड़कर ईंट निर्माण का काम शुरू किया। इससे वे सालाना 6 से 7 लाख रुपये कमातीं हैं। उनकी कहानी आत्मनिर्भरता की जीता- जागता उदाहरण है। pic.twitter.com/pVoZUbAyWU
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