गेवरा खदान में कोल लिफ्टिंग को लेकर बवाल: सुरक्षा को ठेंगे पर रखकर दबंगों ने की जमकर मारपीट, वीडियो हो रहा जमकर वायरल

दो निजी कंपनियों के कर्मचारियों के बीच मारपीट
उमेश यादव- कोरबा। एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार SECL की गेवरा परियोजना एक बार फिर वर्चस्व की जंग का अखाड़ा बन गई है। बीती रात कोयला लिफ्टिंग को लेकर दो निजी कंपनियों के कारिंदो के बीच जमकर मारपीट हुई। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरी वारदात वहां तैनात सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुई, जहां एक कंपनी के कथित गुर्गों ने दूसरी कंपनी के कर्मचारी को बेदम पीटा। इस बर्बरता का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेखौफ 'बाउंसर' और लहूलुहान कर्मचारी
सूत्रों के मुताबिक, गेवरा खदान में लंबे समय से के.के. एंटरप्राइजेज का दबदबा रहा है। आरोप है कि बीती रात कोयला लिफ्टिंग के दौरान के.के. एंटरप्राइजेज से जुड़े कथित बाउंसरों ने केसीपीएल (KCPL) कंपनी के कर्मचारियों पर धावा बोल दिया। पहले तीखी नोकझोंक हुई और देखते ही देखते लाठी-डंडों से मारपीट शुरू हो गई। इस हमले में केसीपीएल के कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है। खदान परिसर के भीतर हुई इस गुंडागर्दी से अन्य कामगारों में दहशत का माहौल है।
गेवरा खदान में बीती रात कोयला लिफ्टिंग को लेकर दो निजी कंपनियों के लोगों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस मारपीट का वीडियो अब जमकर वायरल हो रहा है। pic.twitter.com/K8151SsEeg
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) January 4, 2026
पाली हत्याकांड की पुनरावृत्ति की आशंका
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह घटना पाली क्षेत्र में पिछले वर्ष हुए उस रक्तरंजित टकराव की याद दिलाती है, जिसमें एक ट्रांसपोर्टर की जान चली गई थी। गेवरा की इस घटना ने पुलिस प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। यदि समय रहते इन 'कोल माफियाओं' और उनके गुर्गों पर लगाम नहीं कसी गई, तो दीपका-गेवरा क्षेत्र में भी बड़ी हिंसक वारदात या गैंगवार होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
सत्ता का संरक्षण या प्रशासनिक लापरवाही ?
चर्चा आम है कि इन कोल लिफ्टरों को सत्ता के गलियारों में बैठे रसूखदारों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का वरदहस्त प्राप्त है। यही कारण है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हमलावर इतने बेखौफ हैं। खदान के भीतर घुसकर सुरक्षा बल की मौजूदगी में मारपीट करना और कानून को हाथ में लेना इस बात का प्रमाण है कि इन्हें खाकी या प्रशासन का कोई डर नहीं है। दीपका पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल छोटी धाराओं में कार्रवाई होगी या इन सफेदपोश संरक्षकों तक भी जांच की आंच पहुंचेगी?
खौफ के साये में काम कर रहे अधिकारी- कर्मचारी
इस विवाद का असर खदान के सामान्य कामकाज पर भी पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि खदान में पदस्थ SECL के अधिकारी और कर्मचारी भी इन निजी कंपनियों के आपसी विवाद और आए दिन होने वाले तनाव से बेहद असहज हैं। सुरक्षा के दावों के बीच इस तरह की हिंसा परियोजना की साख और कोयला प्रेषण, दोनों के लिए खतरा बनी हुई है।
