दान की जमीन से बदली तस्वीर: मूक जीवों के लिए बोल उठी इंसानियत, खोला गौ आश्रय, जहां 900 गायों की हो रही सेवा

गौधाम
नागेन्द्र श्रीवास - कोरबा। शहर के एक व्यवसायी ने बेसहारा गायों को आश्रय देने के लिए अपनी 4 एकड़ बेशकीमती जमीन दान कर दी। जिससे गायों को पनाहगाह तो मिला ही अब गोबर से निर्मित कंडों को शहर के मुक्तिधामों में बेचकर उससे एकत्र राशि से ही गौवंशों की सेवा की जा रही है। इस गौधाम में गायों के गोबर से निर्मित खाद भी बाजार में अच्छे दामों पर बेची जा रही है। इस गौधाम में 9 सौ से अधिक बेसहारा गायों की सेवा की जा रही है। हम बात कर रहे हैं ऐसे गौधाम की जिसका संचालन अग्रसेन गौ सेवा समिति द्वारा किया जाता है। जहां लाचार बीमार बेसहारा गायों को आश्रय मिलता है।
जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर सर्वमंगला कनकी मुख्य मार्ग पर सड़क के बाएं ओर ग्राम कनबेरी है। जहां शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी राजकुमार अग्रवाल की जमीन है। उन्होंने गौ संरक्षण के लिए अपनी बेसकीमती 4 एकड़ जमीन को समाज के नाम कर दिया। इस जमीन पर अग्रसेन सेवा समिति ने 13 जनवरी 2011 को गौधाम तैयार किया। गौधाम के अध्यक्ष जयंत अग्रवाल ने हरिभूमि से चर्चा करते हुए बताया कि इस गौधाम में एक भी दुधारू गाय नहीं रखी गई है। बल्कि जितनी भी गाय हैं बेसहारा असहाय बीमार हैं। मौजूदा स्थिति में यहां 900 से अधिक ऐसी ही गायों का पालन किया जा रहा है। इसके पालन के लिए समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया है।
समाज के माध्यम से किया जा रहा है गौधाम का संचालन
उन्होंने ने बताया कि, इस गौधाम को संचालित करने के लिए साल में 60 से 70 लाख रुपए खर्च आता है। पूरा खर्च समाज ही उठाता है और समाज के माध्यम से ही इस गौधाम का संचालन किया जा रहा है। गौधाम की गूंज इतनी दूर तक पहुंच चुकी है कि अब बेसहारा गायों के संरक्षण संवर्धन के लिए शहर के सभी समाज के लोग पहुंचते हैं। वहीं यहां लोग अब समय बिताने के लिए भी पहुंच रहे हैं। इसके अलावा अपने जन्मदिन के साथ-साथ वैवाहिक वर्षगांठ भी मना रहे हैं। गायों के साथ घंटों समय व्यतीत कर अपना मन प्रफुल्लित भी कर रहे हैं।
अंतिम संस्कार के लिए कंडा तो फसल के लिए खाद
अग्रसेन गौ सेवा समिति के अध्यक्ष जयंत अग्रवाल ने बताया कि, गौधाम में लगभग 800 गाय का पालन किया जा रहा है जिनके गोबर से अंतिम संस्कार के लिए कंडा तैयार है। शहर के दो प्रमुख मुक्तिधाम मोतीसागरपारा और पोड़ीबहार मुक्तिधाम में कनबेरी गौधाम से कंडे की सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा गोबर से खाद भी तैयार किया जा रहा है। कनबेरी गौधाम से 50 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से खाद भी बेचा जा रहा है। इसके अलावा बल्क में 40 किलो का पैकेट 5 सौ रुपए में खाद दिया जा रहा है। कंडा और खाद बेचकर समिति मालामाल भी हो रही है और इसी पैसे से धाम का संचालन भी किया जा रहा है।
परिसर में ही कराया जाता है तुलादान
कनबेरी स्थित गौधाम में जहां असहाय गायों की देखरेख की जा रही है। वहीं दूसरी ओर धाम में समाज के लोगों ने मिलकर विशालकाय गौ गोपाल मंदिर भी तैयार किया है। जहां हर साल गोपा अष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। शहर के 1500 से 2000 लोग इस त्यौहार में शामिल होते हैं। साथ ही यहां तुलादान की भी व्यवस्था की गई है। यहां आने वाले लोगों के लिए कम लागत में नाश्ता, चाय पानी व भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। बताया जाता है कि जिन लोगों को यहां आकर भोजन करना होता है उन्हें कम लागत पर ही चाय नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिसमें खास कर छत्तीसगढ़ परंपराओं के अनुरूप ही नाश्ता और खाना तैयार किया जा रहा है।
प्रतिदिन 10 क्विंटल घास किया जाता है तैयार
अग्रसेन गौ सेवा समिति के अध्यक्ष जयंत अग्रवाल व कोषाध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि, इस गौधाम की लगभग 2 एकड़ जमीन में नेपियर घास तैयार किया गया है। घास को तैयार करने में मुख्य रुप से समाज के इंद्र कुमार अग्रवाल व श्याम सुंदर अग्रवाल की भूमिका रही है, जिसमें उन्होंने अपनी मेहनत से गायों के लिए नेपियर व अन्य घास तैयार की गई है। जहां प्रतिदिन लगभग 8 से 10 क्विंटल घास काट कर गायों को भी खिलाया जा रहा है। इसके अलावा बारिश के दिनों में इन गायों के लिए भुट्टा का भी रोपण किया जाता है। गायों की देखरेख करने के लिए 18 से अधिक कर्मचारियों की टीम तैनात है। इसके अलावा बीमार व दुर्घटना में घायल गायों के इलाज के लिए चिकित्सकों की टीम भी तैनात की गई है जो लगातार इनकी देखरेख करते हैं। इस गौधाम को संचालित करने में 1 साल में लगभग 60 लाख से अधिक का खर्च आता है जिसका संचालन करने के लिए समाज के लोग बढ़ चढ़कर सहयोग करते हैं।
