कवर्धा जिले में बैगा बहुल गांव बदहाल: सड़क, बिजली, पानी के बिना जीना मुहाल, दिखावे को लगे सोलर पैनल

कवर्धा जिले में बैगा बहुल गांव बदहाल
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पानी की समस्या से जूझते हुए ग्रामीण

कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल सौरू गांव में 35 बैगा आदिवासी परिवार आज भी बिजली, सड़क और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

संजय यादव- कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में आज भी ऐसे गांव मौजूद हैं, जहां विकास की रोशनी नहीं पहुंच सकी है। जिला मुख्यालय कवर्धा से करीब 65 किलोमीटर दूर बसे सौरू गांव में रहने वाले बैगा आदिवासी परिवार आज भी पानी, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यह वही बैगा समुदाय है जिन्हें देश का विशेष संरक्षित जनजाति माना जाता है और जिन्हें राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र तक कहा जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है।

यह तस्वीरें कबीरधाम जिले के सौरू गांव की हैं। यहां लगभग 35 बैगा परिवार, करीब 200 की आबादी के साथ निवास करते हैं। गांव में ना बिजली है, ना पक्की सड़क और ना ही पीने के लिए स्वच्छ पानी। लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

गांव में सोलर पैनल लगाए गए थे, अब वो भी बंद
गांव में सोलर सिस्टम से एक हैंडपंप लगाया गया है, लेकिन वह भी कभी चलता है, कभी बंद हो जाता है। जब हैंडपंप काम नहीं करता तो ग्रामीणों को मजबूरन दो से ढाई किलोमीटर पैदल चलकर झीरीया से पानी लाना पड़ता है और उसी पानी को पीने के लिए उपयोग करते हैं। बिजली के नाम पर गांव में सोलर पैनल लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी बंद पड़े हैं। रात होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और सामान्य जीवन भी मुश्किल हो गया है।

ना जनप्रतिनिधि ध्यान देते हैं, ना प्रशासनिक अधिकारी- ग्रामीण
गांव में स्कूल तो है, लेकिन बच्चों की शिक्षा की हालत भी चिंताजनक है। ग्रामीणों का कहना है कि, अक्सर शिक्षक गायब रहते हैं, कई बार स्कूल समय पर नहीं खुलता और कभी-कभी बंद भी रहता है। ऐसे में बैगा बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। यह गांव ऐसा प्रतीत होता है मानो संसाधनों और विकास से पूरी तरह कट चुका हो। ग्रामीणों का आरोप है कि, ना जनप्रतिनिधि ध्यान देते हैं, ना प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचते हैं।

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