गगनयात्री शुभांशु शुक्ला पहुंचे जशपुर: अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम में हजारों बच्चों के साथ साझा किए अनुभव, छात्र-छात्राओं ने पूछे कई सवाल

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कार्यक्रम में संवाद करते गगनयात्री शुभांशु शुक्ला

जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित 'अंतरिक्ष संगवारी' कार्यक्रम में गगनयात्री शुभांशु शुक्ला ने 10 हजार बच्चों से अंतरिक्ष यात्रा और स्पेस के अनुभव साझा किए।

अजय सुर्यवंशी - जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के रणजीता स्टेडियम में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘अंतरिक्ष संगवारी’ में भारत वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और गगनयात्री शुभांशु शुक्ला ने शिरकत की। 10 हजार से अधिक स्कूली बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में बिताए अपने 18 दिनों के रोमांचक अनुभव साझा किए। बच्चों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उत्साहपूर्ण माहौल में कार्यक्रम आगे बढ़ा।

बच्चों से सीधा संवाद और अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव
कार्यक्रम के दौरान शुभांशु शुक्ला ने बड़े स्क्रीन पर अपनी अंतरिक्ष यात्रा का डॉक्यूमेंट्री वीडियो दिखाया। साथ ही उन्होंने बताया कि, स्पेस में रहते हुए उन्होंने पृथ्वी के अनेक चक्कर लगाए और अंतरिक्ष में बिताए हर पल के वैज्ञानिक महत्व को महसूस किया। बच्चों के पूछे सवालों के जवाब देकर उन्होंने उनका उत्साह बढ़ाया।

वैज्ञानिक मॉडल और प्रोजेक्ट्स की सराहना
स्टेडियम में लगे विभिन्न ब्लॉकों के बच्चों के विज्ञान प्रोजेक्ट और मॉडल का निरीक्षण करते हुए शुक्ला ने उनमें अपना ऑटोग्राफ दिया। उन्होंने छात्रों की जिज्ञासा, प्रतिभा और मेहनत की प्रशंसा की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देशभक्ति का जज्बा
कार्यक्रम में बच्चों ने लोकनृत्य और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियां दीं। स्टेडियम 'वंदे मातरम' के नारों से गूंज उठा, जिससे माहौल बेहद रोमांचक हो गया।

प्रेरणा की कहानी: कैसे बने गगनयात्री
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष यात्री बनने का सफर कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति से होकर गुजरता है। उन्होंने साझा किया कि प्रशिक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियों, मानसिक मजबूती और तकनीकी कौशल ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

अशोक चक्र से हुए सम्मानित
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 18 दिनों तक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देने और AX-4 मिशन में उत्कृष्ट साहस दिखाने के लिए शुभांशु शुक्ला को 77वें गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। जशपुर में उन्हें सम्मानित करने के साथ बच्चों ने अंतरिक्ष विज्ञान की नई ऊंचाइयों को छूने का संकल्प लिया।

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