सब्जी उत्पादन के इतिहास में नया अध्याय: टमाटर-बैंगन ग्राफ्टिंग से उद्यानिकी छात्रों ने रचा नवाचार का कीर्तिमान

सब्जी उत्पादन में नया अध्याय
अनिल सामंत- जगदलपुर। बदलते कृषि परिदृश्य में जब किसान रोग, बढ़ती लागत और घटते मुनाफे की चुनौती से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में सब्ज़ी उत्पादन को नई दिशा देने वाली ग्राफ्टिंग तकनीक एक क्रांतिकारी समाधान के रूप में सामने आई है। टमाटर और बैंगन की खेती में इस आधुनिक तकनीक के सफल प्रयोग ने यह साबित कर दिया है कि, विज्ञान और नवाचार के सहारे खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और रोग-मुक्त बनाया जा सकता है।
शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय, जगदलपुर में संचालित आरएचडब्लूई एंड एआईए पाठ्यक्रम के चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों ने इस उच्चस्तरीय ग्राफ्टिंग प्रदर्शन को पूर्णतः स्वयं संचालित कर अपनी व्यावहारिक दक्षता का परिचय दिया। यह प्रयोग न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि किसानों के लिए भी एक नई उम्मीद बनकर उभरा। विद्यार्थियों ने खेत स्तर पर ग्राफ्टिंग की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि सही तकनीक अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है।
ग्राफ्टिंग प्रक्रिया में दो अलग-अलग पौधों के भागों को जोड़कर एक नया, अधिक सशक्त पौधा तैयार किया जाता है। इसमें ऊपरी भाग (सायन) उच्च उपज और गुणवत्ता देने वाली किस्म का होता है, जबकि निचला भाग (रूटस्टॉक) मजबूत जड़ प्रणाली प्रदान करता है। इस तकनीक में सायन का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही पौधे की उत्पादकता और गुणवत्ता का आधार बनता है।

क्यों क्रांतिकारी है टमाटर बैंगन ग्राफ्टिंग तकनीक?
ग्राफ्टिंग से तैयार पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, जिससे उकठा, नेमाटोड और जड़ सड़न जैसे रोगों का खतरा कम हो जाता है। बैंगन को रूटस्टॉक के रूप में उपयोग करने से जड़ प्रणाली मजबूत बनती है,पौधों को अधिक पोषक तत्व और जल मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है और उत्पादन अवधि लंबी होती है। इस तकनीक से प्रति पौधा उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होती है,रासायनिक दवाओं का उपयोग घटता है और खेती अधिक सुरक्षित व पर्यावरण-अनुकूल बनती है। किसानों के लिए यह तकनीक कम लागत में अधिक लाभ का भरोसेमंद रास्ता साबित हो रही है।
पुस्तकों तक सीमित न रहकर खेत और प्रयोगशाला बना रहे कर्मक्षेत्र
विद्यार्थियों ने किसानों और ग्रामीणों को ग्राफ्टिंग के व्यावहारिक लाभ समझाते हुए कहा कि यह तकनीक भविष्य की खेती की पहचान बनने जा रही है। इस अवसर पर संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि आज के विद्यार्थी केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर खेत और प्रयोगशाला को अपना कर्मक्षेत्र बना रहे हैं।
ऐसी तकनीकें न केवल किसानों की आय बढ़ाएँगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी को टिकाऊ और सुरक्षित कृषि का मार्ग भी दिखाएँगी। इस कार्यक्रम में चतुर्थ वर्ष की छात्रा फ्लाविया पीटर सहित उनके सभी साथी,आसपास के गाँवों के किसान और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। मार्गदर्शन और समन्वय की भूमिका में महाविद्यालय के अधिष्ठाता और कार्यक्रम समन्वयक मौजूद रहे।
