तीन धर्मांतरित परिवारों ने की घर वापसी: 11 सदस्य ने 22 सालों बाद अपनाया हिंदू धर्म, समाज के लोगों ने पैर धोकर किया स्वागत

तीन धर्मांतरित परिवारों ने की घर वापसी : 11 सदस्य ने 22 सालों बाद अपनाया हिंदू धर्म, समाज के लोगों ने पैर धोकर किया स्वागत
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11 लोगों ने हिंदू धर्म में की वापसी 

जगदलपुर के तीन धर्मांतरित परिवारों के 11 सदस्यों ने 22 वर्षों बाद अपने मूल हिंदू धर्म में वापसी की है। समाज के लोगों ने विधि- विधान से घर वापसी करवाई।

अनिल सामंत- जगदलपुर। बस्तर के विजय वार्ड से निकली यह घटना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से भीतर-ही-भीतर सुलग रहे सामाजिक प्रश्न का मुखर उत्तर बनकर सामने आई। तीन धर्मांतरित परिवारों के 11 सदस्यों ने 22 वर्षों बाद अपने मूल हिंदू धर्म में घर वापसी कर यह स्पष्ट कर दिया कि आस्था को बदला जा सकता है, लेकिन पहचान को नहीं। इस घर वापसी ने बस्तर में धर्मांतरण, सामाजिक दबाव और सांस्कृतिक विच्छेदन जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक और सांस्कृतिक चेतना से भरा रहा। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ घर वापसी कराए गए परिवारों को हिंदू परंपराओं, मूल्यों और जीवन दर्शन से पुनः जोड़ा गया। शिव मंदिर परिसर में सुंदरकांड पाठ के साथ भजन-कीर्तन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में माताओं-बहनों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता रही। इसके पश्चात राम भोज का आयोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।


घर वापसी करने वाले परिवारों ने जताई ख़ुशी
घर वापसी करने वाले परिवारों ने भावुक स्वर में कहा कि, 22 वर्षों बाद श्रीराम ने बुलाया, तो लौटना ही पड़ा। यह कथन केवल आस्था की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उस पीड़ा का संकेत है, जिसे वर्षों तक भीतर दबाकर रखा गया। स्थानीय नागरिकों ने इसे बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों से दोबारा जुड़ने वाला निर्णायक कदम बताया।

धर्मांतरण की जड़ें काफी गहरी
विजय वार्ड की यह घर वापसी केवल 11 लोगों की धार्मिक वापसी नहीं, बल्कि बस्तर में वर्षों से चल रहे धर्मांतरण के सामाजिक प्रभावों पर सीधा सवाल है। तीन परिवारों का 22 साल बाद मूल में लौटना यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक जड़ें कितनी गहरी होती हैं और दबाव में बदली गई पहचान अंततः अपने स्रोत की ओर लौटती है। सुंदरकांड, भजन-कीर्तन और सामूहिक भोज के माध्यम से यह संदेश गया कि हिंदू समाज केवल स्वीकार करता ही नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जोड़ता है। यह आयोजन बस्तर में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बनकर उभरा है।


ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में मार्गदर्शन की भूमिका में अविनाश सिंह गौतम, नेतृत्व में ढालेश्वर नाग, विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष प्रतीक सिंह सहित अजय सेठिया, कन्हैया सोना, अरुण बघेल, सोमेश नाग, मंजय जाल, मोहन बघेल, ब्रजेश शर्मा, मुन्ना बजरंगी, बंटू पांडे, देवेंद्र कश्यप,शुभम गुप्ता, बजरंग दल एवं सक्षम के कार्यकर्ता तथा वार्ड के सम्माननीय जन उपस्थित रहे।

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