आवारा मवेशियों से दोहरी मार: किसानों की फसल पर संकट, इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति ने गांव-गांव में शुरू किया 'गौ रक्षा अभियान'

इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति की बैठक
अनिल सामंत- जगदलपुर। रबी और खरीफ के बीच संक्रमण काल में खेतों में मक्का, चना, धान, दलहन और सब्जियों की बुवाई तेज हो चुकी है। वहीं कई किसानों की सब्जी फसल कटाई के करीब है। ऐसे समय में आवारा मवेशियों द्वारा फसलों को पहुंचाया जा रहा नुकसान किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। खेतों में घुसते मवेशी न सिर्फ तैयार फसल चौपट कर रहे हैं। बल्कि, किसानों की मेहनत और लागत पर भी सीधा प्रहार कर रहे हैं। इससे किसानों को दोहरी क्षति उपज का नुकसान और आय में गिरावट झेलनी पड़ रही है।
इसी समस्या को जड़ से रोकने के लिए इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति, बस्तर ने गौ रक्षा अभियान की शुरुआत की है। समिति द्वारा गांव-गांव जनजागृति अभियान चलाकर किसानों और पशुपालकों से अपील की जा रही है कि मवेशियों को खुला न छोड़ा जाए। अभियान का उद्देश्य टकराव नहीं,बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और सामाजिक अनुशासन के जरिए फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बैठक में प्रचार-प्रसार तेज करने पर बनी सहमति
इस सिलसिले में तोकापाल ब्लॉक के छापरभानपुरी में आयोजित बैठक में अभियान को संगठित रूप देने, प्रचार-प्रसार तेज करने और ग्राम स्तर पर निगरानी की रणनीति पर सहमति बनी। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों की आर्थिक स्थिति पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ेगा।

गौ रक्षा अभियान के तहत यह हुआ तय
बैठक में यह तय हुआ कि, गांव-गांव जनजागृति अभियान चलाकर पशुपालकों से मवेशी न छोड़ने की अपील की जाएगी। खेतों की सुरक्षा के लिए ग्राम स्तर पर सामूहिक निगरानी व्यवस्था बनेगी।फसल अवधि के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाएगी।किसानों के नुकसान को रोकने के लिए सामाजिक सहमति और सहभागिता पर जोर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर ग्राम सभाओं में नियम तय कर उनका पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित
इस बैठक में सचिव (इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति) सुभाष कश्यप, जनपद सदस्य गंगा बघेल, हिड़मो मंडवी, पूर्व सरपंच मुना लाल कश्यप, जीवनाथ मौर्य, अनिल बघेल, उप सरपंच बोदा कश्यप, बुदरू बघेल, जगदीश बघेल, लच्छू समलू कश्यप सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
