निर्माणाधीन गौरव वाटिका पहुंचे केदार कश्यप: 3 करोड़ में हो रहा निर्माण, प्रकृति की गोद में चैन की सांस ले पाएंगे जगदलपुरवासी

निर्माणाधीन गौरव वाटिका पहुंचे केदार कश्यप
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निरीक्षण के दौरान मंत्री केदार कश्यप 

जगदलपुर के कुम्हड़ाकोट में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से बन रही जनजातीय गौरव वाटिका जल्द तैयार होगी।

महेंद्र विश्वकर्मा- जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शनिवार को वन मंत्री केदार कश्यप ने शहर के निकट कुम्हड़ाकोट में निमार्णाधीन जनजातीय गौरव वाटिका का निरीक्षण किया। इस दौरान शहर को एक बड़ी सौगात दी है। जगदलपुरवासियों को शहर की आपाधापी, धूल और प्रदूषण से दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने शनिवार को शहर के निकट कुम्हड़ाकोट में निमार्णाधीन जनजातीय गौरव वाटिका का निरीक्षण किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह वाटिका न केवल पर्यटन का केंद्र होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश करेगी।

निरीक्षण के दौरान वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने वन मंत्री को अवगत कराया कि लगभग 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरू में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, लेकिन अब इसे एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए यहां लगभग 1700 मीटर का एक लंबा वॉकिंग ट्रेल बनाया गया है।


पारिवारिक आयोजनों और छोटी पार्टियों के लिए होगा सर्वश्रेष्ठ
इसके साथ ही योगा शेड, योगा जोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी यहां उपलब्ध होंगी, जिससे लोग ताजी हवा में अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकेंगे। पर्यटकों के मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए वाटिका में कई आकर्षक प्रयोग किए गए हैं। वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में गपशप जोन बनाए गए हैं, जहां प्लेटफॉर्म और कुर्सियां लगाई गई हैं ताकि लोग आराम से बैठकर बातचीत कर सकें। पारिवारिक आयोजनों और छोटी पार्टियों के लिए यहां पांच सुंदर पगोड़ा निर्मित किए गए हैं, जिन्हें बर्थडे पार्टी या अन्य कार्यक्रमों के लिए बुक किया जा सकेगा। इसके अलावा बच्चों के लिए एक अलग प्ले एरिया भी तैयार किया जा रहा है।


अलग-अलग प्रसाधन की व्यवस्था भी
जंगल के नैसर्गिक वातावरण में भोजन का आनंद लेने के लिए एक विशेष डाइनिंग क्षेत्र भी विकसित किया गया है, जिसका संचालन स्थानीय महिला समूहों या समितियों के माध्यम से किया जाएगा। आगंतुकों की सुविधाओं का भी यहां पूरा ख्याल रखा जाएगा। प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग, टिकट काउंटर और महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रसाधन की व्यवस्था की गई है।


निरीक्षण में ये भी रहे मौजूद
विभाग की भविष्य की योजनाओं में यहां ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की भी तैयारी है। जिससे आने वाले समय में यह वाटिका बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल बनकर उभरेगी। वन मंत्री के निरीक्षण के दौरान वाटिका में सीसीएफ आलोक कुमार तिवारी, एसडीओ देवलाल दुग्गा, रेंजर देवेन्द्र सिंह वर्मा आदि शामिल रहे।


दोने और पत्तल में परोसा जाएगा भोजन
बताया जा रहा है कि इस वाटिका की सबसे अहम विशेषता इसकी इको-फ्रेंडली नीति है। यह पूरा क्षेत्र प्लास्टिक फ्री जोन होगा। पर्यटकों को बाहर से किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री या फूड पैकेट अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। खान-पान की पूरी व्यवस्था अंदर स्थित कैंटीन में ही रहेगी, जहां पूर्णत: बायो-डिग्रेडेबल दोने और पत्तल में ही भोजन परोसा जाएगा। इसके अतिरिक्त यह वाटिका जैव-विविधता के संरक्षण का केंद्र भी बनेगी। यहां कांगेर घाटी और बस्तर के अन्य वन क्षेत्रों से विलुप्त हो रही दुर्लभ स्थानीय प्रजातियों के पौधों और विभिन्न प्रकार के सुंदर ऑर्किड को लाकर संरक्षित किया जा रहा है, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके साथ ही यहां तालाब और उसमें आइलैंड का निर्माण भी किया गया है।

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