बस्तर विवि में कार्यशाला: मुख्य अतिथि बोले- भारतीय प्राचीन ज्ञान ही आगे चलकर बना आधुनिक ज्ञान

भारतीय ज्ञान परंपरा और विकसित भारत-2047 की संकल्पना कार्यशाला
अनिल सामंत- जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शनिवार को 'भारतीय ज्ञान परंपरा और विकसित भारत-2047 की संकल्पना' विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का मार्गदर्शक है। हमारे विचार, जीवनशैली और सामाजिक मूल्यों में इसके तत्व पहले से ही मौजूद हैं, आवश्यकता है तो इन्हें प्रमाणिक रूप से समझने, आत्मसात करने और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने की।
कार्यशाला में यह विचार प्रमुखता से उभरा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखकर युवाओं के सर्वांगीण विकास की राह खोलती है। यह नीति केवल रोजगारोन्मुखी नहीं, बल्कि मूल्यनिष्ठ, नैतिक और मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत करने वाली है। वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक उन्नति भी है।जनजातीय संस्कृति सहित भारत की विविध सांस्कृतिक धाराओं को साथ लेकर चलना ही समावेशी विकास की सच्ची पहचान है।

भारतीय प्राचीन ज्ञान ही आगे चलकर आधुनिक ज्ञान का आधार बना
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि यदि देश वर्तमान विकास दर को बनाए रखता है तो आने वाले वर्षों में वह विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। इसके लिए स्वावलंबन, तकनीक आधारित शिक्षा, भारतीय दृष्टिकोण से विषयों का अध्ययन और मानव संसाधन के समुचित उपयोग पर बल दिया गया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि भारतीय प्राचीन ज्ञान ही आगे चलकर आधुनिक ज्ञान का आधार बना, जिसे अब पुनः अपने देश में सम्मान और व्यवहार में लाने की आवश्यकता है।
भारतीय ज्ञान परंपरा विषय नहीं, विचारधारा
कार्यशाला में यह बात विशेष रूप से उभरी कि भारतीय ज्ञान परंपरा कोई एक विषय नहीं, बल्कि एक व्यापक जीवन-दृष्टि है। इसमें तर्क, व्यवहार, आचरण और आत्मबोध का संतुलन है। विकसित भारत के लिए आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक, मानसिक और नैतिक उन्नति भी अनिवार्य है। भारतीय परंपराओं को संरक्षित करना और उन्हें व्यवहार में लाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। युवाओं को विदेशी प्रतिमानों की बजाय भारतीय आदर्शों से प्रेरणा लेकर लगन, अभ्यास और समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

इन वरिष्ठ लोगों ने अपने विचार किए व्यक्त
इस दौरान अपने विचार रखने वालों में लाल बहादुर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो आरपी पाठक, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मनोज कुमार श्रीवास्तव, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय कांकेर के प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश मिश्रा तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ रश्मि देवांगन ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ कुश कुमार नायक द्वारा किया गया।
