कमिश्नरेट का पहला सप्ताह: अभी भी पुराने सिस्टम से दर्ज हो रहे अपराध

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रायपुर। राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुए छह दिन हो गए हैं। सिस्टम को पूरी तरह से अमल में लाने शासन स्तर पर युद्ध स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने पर कमिश्नर तथा कमिश्नरेट में शामिल अन्य अफसरों को जो कानूनी शक्तियां प्रदान की गई हैं, उसके लिए अब तक प्रयास नहीं किया गया है।
एक्सपर्ट के अनुसार, कानून व्यवस्था में कसावट लाने कमिश्नर तथा कमिश्नरेट में शामिल अन्य पुलिस अफसरों को उनकी कानूनी शक्तियां तत्काल प्रभाव से मिलनी चाहिए। कमिश्नरेट में अभी भी तकनीकी स्तर पर पुरानी पुलिस व्यवस्था लागू है। राजधानी के शहरी क्षेत्र में पुलिस कमिश्नरेट प्रथा 23 जनवरी से लागू हो गई है। कमिश्नरेट में कमिश्नर से लेकर अन्य पुलिस कमिश्नरेट अफसरों की नियुक्ति कर दी गई है।
गुंडे-बदमाशों की धरपकड़ तेज
कमिश्नरेट लागू होने के बाद पिछले छह दिनों में कमिश्नरेट में शामिल शहरी क्षेत्र के तीन जोन में डीसीपी से लेकर अन्य पुलिस अफसरों ने जमीनी स्तर पर छापे की कार्रवाई करने के साथ गुंडे-बदमाशों की धरपकड़ तेज कर दी है। इन छह दिनों में पुलिस ने शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से दो दर्जन से ज्यादा बदमाशों के खिलाफ पुरना सीआरपीसी की प्रतिबंधात्माक धारा 151, 107/16 जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता जो अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170, 146/152 के तहत कार्रवाई की है।
बदमाशों की एडीएम कोर्ट में पेशी
जिन बदमाशों के खिलाफ छह दिनों में पुलिस ने प्रतिबंधात्मक धारा के तहत कार्रवाई की है, उन बदमाशों को पुराने नियम तथा कानून के तहत पुलिस ने एडीएम कोर्ट में पेश कर जेल भेजने का कार्य किया है। जानकार इसका कारण विधि विभाग द्वारा कमिश्नरेट के अफसरों को अब तक उनके कानूनी अधिकारी नहीं देने की बात बता रहे हैं।
अफसरों का दो दिन प्रशिक्षण
पुलिस कमिश्नरेट में शामिल पुलिस अफसरों का शुक्रवार तथा शनिवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण शिविर में पुलिस कमिश्नरेट के अफसरों को उनकी कानूनी शक्तियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा कार्रवाई करने के संबंध में उन्हें जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण शिविर में डीसीपी से लेकर एडीसीपी, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सहित थानों के टीआई शामिल होंगे।
तय नहीं कानूनी शक्तियों का पालन किस स्तर के अधिकारी करेंगे
एनएसए, जिला बदर जैसी कार्रवाई करने का अधिकार पुलिस कमिश्नर के साथ असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के पास होगा। इसके अलावा प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत जेल भेजने का अधिकारा डीसीपी स्तर के अधिकारियों को मिलेगा। इसके साथ ही एडीसीपी स्तर के पुलिस अधिकारियों को प्रतिबंधात्मक धारा के तहत बदमाशों को जेल भेजने के अधिकार मिलेंगे या नहीं, यह अब तक क्लीयर नहीं है। कानूनी मामलों के जानकारों के अनुसार एडीसीपी स्तर के पुलिस अफसरों को प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत जेल भेजने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे डीसीपी पर कार्य का दबाव कम होगा।
