सीतानदी टाइगर रिजर्व में मिला बीमार दुर्लभ गिद्ध: महाराष्ट्र के ताडोबा से 400 किलोमीटर की उड़कर पहुंचा, उपचार शुरू

महाराष्ट्र के ताडोबा से 400 किलोमीटर की उड़कर पहुंचा, उपचार शुरू
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सीतानदी टाइगर रिजर्व में ट्रांसमीटर और जीपीएस लगा हुआ एक बीमार दुर्लभ व्हाइट रंपड गिद्ध मिला है।

सौम्या यादव- धमतरी। छत्तीसगढ़ के सीतानदी टाइगर रिजर्व में ट्रांसमीटर और जीपीएस लगा हुआ एक बीमार दुर्लभ व्हाइट रंपड गिद्ध मिला है। व्हाइट रंपड गिद्ध महाराष्ट्र के ताडोबा अँधारी टाइगर रिजर्व से 400 किलोमीटर की उड़ान भर कर आया है। गिद्ध को देखने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जहां उन्होने रेस्क्यू कर उसका इलाज शुरू कर दिया।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में गिद्ध किए जा रहे संरक्षित
इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। मध्य भारत के सबसे स्वच्छ नदी-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल यह रिजर्व अब केवल बाघों और जंगली भैंसों का ही नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।


सीएम साय के निर्देश पर बनाए जा रहे सेफ जोन
सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार इंद्रावती के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों सुरक्षित क्षेत्रों (Vulture Safe Zones) का निर्माण कर इनकी घटती आबादी को बचाना और बढ़ाना है, क्योंकि गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है l गिद्धों के अस्तित्व पर जहरीली दवाओं (NSAID), असुरक्षित शव निपटान और मानव हस्तक्षेप जैसे गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में उपग्रह (सैटेलाइट) टेलीमेट्री आधारित निगरानी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।




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