धमतरी के खेतों में मिला तेंदुए का शावक: जंगल से भटककर आया 6 महीने का मासूम, रेस्क्यू कर भेजा गया रायपुर के जंगल सफारी

leopard cub rescued and sent Raipur Jungle Safari
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खेतों के बीच मिला तेंदुए का 5-6 माह का शावक

धमतरी जिले के सिहावा नगरी क्षेत्र में खेतों के बीच घूमता तेंदुए का शावक मिला। जिसे वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर नया रायपुर के जंगल सफारी भेजा।

अंगेश हिरवानी - नगरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा नगरी वनांचल क्षेत्र में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ग्रामीणों ने खेतों के बीच एक तेंदुए के शावक को घूमते देखा। कुछ ही देर में गांव के लोग बड़ी संख्या में वहाँ पहुँच गए, जिसके बाद वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।

शावक दिखते ही गांव में दहशत
धमतरी के बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र के छिपली पारा गांव में ग्रामीणों की नजर अचानक खेतों में घूम रहे तेंदुए के शावक पर पड़ी। लगभग 5-6 माह का यह नन्हा वन्यप्राणी घने जंगल से भटककर राजस्व क्षेत्र तक पहुँच गया था। उसे देखने के लिए भीड़ जुटने लगी, जिससे इलाके में हलचल और भय का माहौल बन गया।


वन विभाग ने मौके पर संभाली स्थिति
ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने भीड़ को पीछे हटाया और पूरी सावधानी के साथ शावक को पकड़कर अपने कब्जे में लिया। इसके बाद वन विभाग के वाहन से उसे नगरी स्थित पशु चिकित्सालय ले जाकर प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

स्वास्थ्य परीक्षण में सब सामान्य
परीक्षण के दौरान शावक पानी में भीगा हुआ पाया गया, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वह जंगल के किसी जलस्रोत या नाले के पास से भटक गया होगा। जांच में उसकी स्थिति सामान्य पाई गई। प्राथमिक उपचार के बाद वन विभाग ने उसे नया रायपुर स्थित जंगल सफारी भेज दिया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी कर रही है।


अधिकारियों ने दी जानकारी
वन परिक्षेत्र अधिकारी सुरेंद्र कुमार अजय ने बताया कि, शावक की उम्र लगभग 5-6 माह है और फिलहाल वह पूरी तरह स्थिर है। उन्होंने कहा कि जंगल सफारी में विशेषज्ञ उसकी देखभाल कर रहे हैं और आगे की परिस्थितियों को देखते हुए पुनर्वास पर निर्णय लिया जाएगा।

मानव-वन्यजीव टकराव का बढ़ता खतरा
सिहावा नगरी क्षेत्र पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा है, जो तेंदुआ, भालू सहित कई वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास है। भोजन व पानी की तलाश में वन्यजीवों का गांवों की ओर आना अब आम हो गया है, जिससे कई बार मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है।

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