छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का डिजिटल मॉडल: सरकार की पारदर्शी नीति देशभर में मिसाल, किसान सम्मान का नया अध्याय शुरू

धान खरीदी प्रक्रिया
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विष्णु सरकार की धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता

सीएम विष्णुदेव साय की सरकार ने धान खरीदी को डिजिटल, नियंत्रित और किसान-हितैषी बनाकर छत्तीसगढ़ की पारदर्शिता को राष्ट्रीय मॉडल बना दिया है।

रायपुर। धान उत्पादन में देशभर में अग्रणी छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में धान खरीदी की प्रक्रिया को बिल्कुल नए स्वरूप में स्थापित किया है। सरकार ने आधुनिक तकनीक, डिजिटल सत्यापन, निष्पक्ष भुगतान व्यवस्था और मजबूत निगरानी तंत्र के आधार पर ऐसी पारदर्शी प्रणाली तैयार की है, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। किसानों की सुविधा, उनकी आय और विश्वास को केंद्र में रखकर लागू की गई यह व्यवस्था अब देश में ‘सर्वश्रेष्ठ पारदर्शिता मॉडल’ के रूप में पहचान बना चुकी है।

स्पष्ट कैलेंडर और समयबद्ध खरीदी व्यवस्था
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी का स्पष्ट और सुव्यवस्थित कैलेंडर पहले से घोषित कर किसानों को बड़ी सुविधा दी। धान खरीदी का सीज़न 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को कटाई, सुखाई और परिवहन की पूरी योजना बनाने में पर्याप्त समय मिला। इस बार सरकार ने खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाकर उन्हें और अधिक सक्षम बनाया, जिससे भीड़ प्रबंधन सरल हुआ और किसानों को अपने ही क्षेत्र में आसानी से धान बेचने का अवसर मिला।


रियल-टाइम मॉनिटरिंग और कंट्रोल
खरीदी शुरू होने से महीनों पहले ही केंद्रों का भौतिक निरीक्षण, तकनीकी अपग्रेडेशन और स्टाफ की तैनाती पूरी कर ली गई, ताकि किसी भी जिले में अव्यवस्था की स्थिति न बने। 2025-26 में खरीदी प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी रखने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड में नए मॉनिटरिंग फीचर्स जोड़े गए, जिससे खरीदी की रियलटाइम ट्रैकिंग संभव हो सकी। इस साल का कैलेंडर-आधारित प्रबंधन किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी रहा और पूरी खरीदी प्रणाली अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनी।


किसान राम बरन सिंह को डिजिटल धान खरीदी से मिला भरोसा
जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के ग्राम साल्ही निवासी किसान राम बरन सिंह मरकाम ने चैनपुर उपार्जन केंद्र में 51.20 क्विंटल धान का पूरी तरह तकनीक आधारित और पारदर्शी प्रक्रिया से सफल विक्रय किया। डिजिटल तौल, समयबद्ध भुगतान और उपार्जन केंद्र पर उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से उन्हें सम्मानजनक अनुभव मिला। उन्होंने बताया कि इस सुव्यवस्थित व्यवस्था से अब किसान बिना किसी असमंजस के अपनी आगे की खेती, पारिवारिक आवश्यकताओं और बच्चों की शिक्षा की योजना बना पा रहे हैं। किसान हितैषी नीतियों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।


₹3100 प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य और किसान-केंद्रित नीति
भाजपा सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए ₹3100 प्रति क्विंटल की दर सुनिश्चित करना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी फैसला साबित हुआ। यह दर केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता राशि को जोड़कर तय की गई, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। सरकार ने प्रति किसान 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा निर्धारित की, जिसके पीछे उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों को प्राथमिकता देना और अनियमित खरीद को रोकना था। इस नीति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक ऊर्जा पैदा की और किसानों में यह विश्वास मजबूत किया कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य उन्हें निश्चित रूप से मिलेगा।

Tuhar Token मोबाइल ऐप ने बदली खरीदी केंद्रों की तस्वीर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा शुरू किया गया 'टोकन तुंहर हाथ' मोबाइल ऐप धान खरीदी की पारदर्शी प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना। इस ऐप के माध्यम से किसान घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सके, जिससे खरीदी केंद्रों पर लंबी कतारें, भीड़, विवाद और इंतजार की समस्या लगभग समाप्त हो गई। किसान अपनी सुविधा के अनुसार दिन और समय चुनकर खरीदी केंद्र पहुंचते रहे और इससे खरीदी प्रक्रिया में अनुशासन और सुगमता आई। ऐप 24×7 उपलब्ध रहा और इसे लेकर किसानों में विशेष उत्साह दिखा, क्योंकि इसने समय, श्रम और लागत तीनों की बचत कराई। ग्रामीण स्तर पर यह डिजिटल क्रांति भाजपा सरकार की तकनीक-आधारित सोच का स्पष्ट प्रमाण है।


किसान देवेश्वर प्रसाद को 'तुंहर टोकन ऐप' से घर बैठे मिली सुविधा
ग्राम पंचायत करजी के किसान देवेश्वर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि किसान 'तुंहर टोकन ऐप' के माध्यम से घर बैठे टोकन काटने से समय और श्रम की बचत हो रही है तथा तय तिथि पर उपार्जन केन्द्र पहुंचकर सहज रूप से धान विक्रय हो रहा है। केन्द्र पर गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाने की उपलब्धता जैसी सभी प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। पारदर्शी व्यवस्था और किसान हितैषी नीतियों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

e-KYC, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल फसल सर्वे से बढ़ी पारदर्शिता
धान खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने e-KYC, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल फसल सर्वेक्षण को अनिवार्य किया। प्रत्येक किसान की पहचान को डिजिटल माध्यम से सत्यापित किया गया और फसल सर्वे का पूरा डेटा ग्राम सभाओं में सार्वजनिक रूप से पढ़ा गया, जिससे गांव स्तर पर सामाजिक निगरानी स्वयं सुनिश्चित हुई। इस कड़े और तकनीक-संचालित सत्यापन से फर्जी पंजीकरण, बाहरी राज्यों से आने वाला धान, और बिचौलियों की भूमिका पर पूरी तरह रोक लगी। इससे यह भरोसा बढ़ा कि खरीदी केंद्रों में वास्तविक किसानों का ही धान खरीदा जा रहा है और सरकारी सहायता सीधे असली पात्रों तक पहुँच रही है।


DBT के माध्यम से 6-7 दिनों में सीधा भुगतान
धान खरीदी के बाद किसानों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए 6-7 दिनों के भीतर पहुंचाया गया। इस व्यवस्था ने न केवल भुगतान प्रक्रिया को तेजी दी, बल्कि किसानों को साहूकारों और बिचौलियों पर निर्भर रहने की मजबूरी से भी मुक्त किया। अब तक हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं, जो इस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता और ईमानदारी को दर्शाता है। समय पर भुगतान ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और खरीदी प्रणाली पर उनका भरोसा अत्यधिक बढ़ा।

बहु-स्तरीय निगरानी और सख्त नियंत्रण व्यवस्था
धान खरीदी की निगरानी के लिए राज्य स्तर से लेकर जिला और उपार्जन केंद्र स्तर तक एक मजबूत निगरानी प्रणाली लागू की गई। ऑनलाइन डैशबोर्ड, कंट्रोल रूम और नियमित निरीक्षणों ने सुनिश्चित किया कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। अवैध धान परिवहन, सीमा पार से धान लाने, और कालाबाजारी को रोकने के लिए विशेष निगरानी दल सक्रिय रहे और कई मामलों में त्वरित कार्रवाई की गई। इससे खरीदी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रही और किसानों को भरोसेमंद वातावरण मिला।


धान से शिक्षा की ओर बढ़ा बिटावन बाई का परिवार
धमतरी जिले के आमदी गांव की किसान श्रीमती बिटावन बाई ध्रुव ने साढ़े चार एकड़ में उपजाए 92 क्विंटल धान का सहकारी समिति में सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से विक्रय किया। ऑफलाइन टोकन, समय पर तौल, बारदाना, छाया और पेयजल जैसी सुविधाओं से उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि सरल और किसान हितैषी व्यवस्था से अब धान विक्रय को लेकर चिंता समाप्त हो गई है। धान से प्राप्त राशि का उपयोग वे बच्चों की शिक्षा, रबी में दलहन फसल की खेती और पुराने कर्ज के भुगतान में करेंगी। यह कहानी शासन की नीतियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त होने का सशक्त उदाहरण है।

किसानों का विश्वास और भाजपा सरकार की मजबूत छवि
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की किसान-केंद्रित नीति ने छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान से जुड़ी प्रणाली बना दिया है। टेक्नोलॉजी, सख्ती, पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान जैसे कदमों ने भाजपा सरकार की छवि को मजबूत किया और किसानों में आत्मविश्वास बढ़ाया। आज छत्तीसगढ़ की धान खरीदी प्रणाली पूरे देश में एक आदर्श मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जिसे अन्य राज्य भी अपनाने की दिशा में सोच रहे हैं।

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