धर्म- बीमारी और गरीबी के बीच फंसा आदिवासी परिवार: कुष्ठ रोग से पीड़ित होने की वजह से पंचायत ने गांव से किया बेदखल, अब मदद की दरकार

धर्म- बीमारी और गरीबी के बीच फंसा आदिवासी परिवार : कुष्ठ रोग से पीड़ित होने की वजह से पंचायत ने गांव किया बेदखल, अब मदद की दरकार
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कुष्ठ रोग पीड़ित

तोंगपाल ब्लॉक के कुम्मा कोलेंग गांव में रहने वाला बामन मंडावी जिसने ईसाई धर्म अपनाया है। कुष्ठ रोग से पीड़ित होने की वजह से उसे गांव से बेदखल कर दिया है।

पंकज भदौरिया- दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम और इंसानियत पर सवाल खड़ी करती है। यह कहानी है एक आदिवासी युवक की, जिसका धर्म बदलना और बीमारी से जूझना उसके पूरे परिवार के लिए सजा बन गया है। सुकमा जिले के तोंगपाल ब्लॉक के कुम्मा कोलेंग गांव से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। गांव का रहने वाला बामन मंडावी जिसने ईसाई धर्म अपनाया और वह कुष्ठ रोग से पीड़ित है। उसे गांव की पंचायत ने फैसला सुनाकर उसे गांव से बेदखल कर दिया।

पंचायत के इस एक फैसले ने बामन की पूरी जिंदगी को नरक में बदल दिया है। पत्नी की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। अब बामन अकेले अपने दो मासूम बच्चों के साथ जिंदगी की भीख मांग रहा है। आज बामन और उसके बच्चे दंतेवाड़ा के पताररास इलाके में सड़क किनारे बने एक त्रिपाल की झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। एक महीना हो चुका है, लेकिन यह ठिकाना भी स्थायी नही है। बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है। एक मासूम जूते-चप्पल की दुकान पर काम करता है और दूसरा अपने बीमार पिता के साथ भीख मांगने निकलता है।

वन विभाग ने दी है झोपड़ी हटाने की चेतावनी
धर्म बीमारी और गरीबी तीनो के बीच फंसा एक आदिवासी परिवार जिसे मदद की दरकार है। बामन अपने बच्चे को पढ़ाना चाहता है। लेकिन वह गांव लौट नही सकता और जिस जगह अस्थाई त्रिपाल की झोपड़ी बनाई है। उसे भी वन विभाग के कर्मचारियों ने हटाने की चेतावनी दी है। ऐसे मुश्किल हालात में अब बामन क्या करे उसे समझ नही आ रहा है। पीड़ित कुष्ठ ग्रसित है और उसे गांव से भगा दिया गया है। ऐसे में उसका जीवन कठिन बच्चों की पढ़ाई मुश्किल हो गयी है।


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