वार्ड में तब्दील होंगी डीके अस्पताल की बंद दुकानें: भर्ती होंगे बर्न प्लास्टिक एवं न्यूरो सर्जरी विभाग के मरीज

वार्ड में तब्दील होंगी डीके अस्पताल की बंद दुकानें : भर्ती होंगे बर्न प्लास्टिक एवं न्यूरो सर्जरी विभाग के मरीज
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निर्माण के बाद से ही विवादों में रहने की वजह से डीके अस्पताल की बंद दुकानों को वार्ड बनाने का काम शुरू हो गया है।

रायपुर। निर्माण के बाद से ही विवादों में रहने की वजह से डीके अस्पताल की बंद दुकानों को वार्ड बनाने का काम शुरू हो गया है। यहां बर्न एवं प्लास्टिक एवं न्यूरो सर्जरी के मरीजों को भर्ती किया जाएगा। भूतल की चार दुकान और प्रथम तल पर बड़ा हॉल वाले इस भवन को तीन मंजिला वार्ड बनाया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के निर्देश पर सीजीएमएससी द्वारा भवन की नापजोख भी कर ली गयी है।डीके अस्पताल की शुरुआत के दौरान इन दुकानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होने की संभावनाओं को ध्यान में रखकर कराया गया था। कुछ समय तक दुकानों का संचालन हुआ, फिर मामला विवादों में आ गया और लंबी न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद भवन का कब्जा अस्पताल प्रबंधन को मिला था। इसे पुनः प्रारंभ करने तीन साल पहले टेंडर की कोशिश की गई, मगर सफलता नहीं मिली थी।

पिछले दिनों अस्पताल पहुंचे चिकित्सा शिक्षा आयुक्त रितेश अग्रवाल ने बंद दुकान वाले इस भवन का उपयोग वार्ड बनाकर करने कहा था। सीएमई के निर्देश के बाद इस पर काम शुरू हो गया है और सीजीएमएससी की टीम ने भवन के रिनोवेशन और वार्ड तैयार करने की जरूरतों के आधार पर उसका नापजोख कर लिया है। जल्दी ही आवश्यकता के अनुसार तोड़फोड़ और निर्माण शुरू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित तीन मंजिला भवन में बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग और न्यूरो सर्जरी से संबंधित मरीजों को भर्ती किया जाएगा।

न्यूरो सर्जरी के डेढ़ सौ बेड कम
वर्तमान में न्यूरो से संबंधित मरीजों का इलाज डीके अस्पताल में किया जाता है। शासकीय स्तर पर एम्स और डीके अस्पताल में इसके इलाज की व्यवस्था होने के कारण काफी भीड़ रहती है। डेढ़ सौ बेड की क्षमता वाले इस विभाग में कई बार मरीजों की संख्या बढ़ने पर परेशानी हो जाती है। इसी तरह अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में 20 बेड है जो जरूरतों के हिसाब से काफी कम है। नए वार्ड बनने से यहां ज्यादा मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा सकेगा।

अभी अटेंडरों का ठिकाना
मरीजों के जलपान की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाए गए दुकान सालों से बंद पड़े हैं। वर्तमान में यह इलाज के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके अटेंडरों का ठिकाना बना हुआ है। गर्मी के दिनों में ड्यूटी करने वाले सुरक्षा गाडों के लिए भी यह राहत देने वाला ठिकाना बनता है। वार्ड के रूप में इसके परिवर्तित होने के बाद यहां गंभीर मरीजों को एडमिट किया जाएगा।

ज्यादा लोगों का इलाज होगा
डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल उप अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया कि,नया वार्ड बनने के बाद ज्यादा मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया जा सकेगा। भवन का जरूरी रिनोवेशन सीजीएमएससी के द्वारा पूरा किया जाएगा।

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