CGMSC घोटाला: ईओडब्ल्यू- एसीबी ने मोक्षित कारपोरेशन के डायरेक्टर के जीजा सहित तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

तीनों आरोपी गिरफ्तार
रायपुर। सीजीएमएससी घोटाला मामले में ईओडब्ल्यू- एसीबी की टीम ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सोमवार को एजेंसी ने आरोपी अभिषेक कौशल, राकेश जैन और प्रिंस जैन की गिरफ्तारी की है। आरोपी प्रिंस जैन मोक्षित कारपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा का रिश्ते में जीजा है। तीनों को पुलिस ने 27 जनवरी तक रिमांड पर लिया है। अब जांच एजेंसी रिमांड में आरोपियों से विस्तृत पूछताछ करेगी।
एजेंसी ने प्रेस नॉट जारी कर बताया कि, राज्य के आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों में "हमर लैब" योजना अंतर्गत क्रय किए जाने वाले मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की निविदा प्रक्रिया में पुल टेण्डरिंग के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा निविदा प्राप्त की गई। विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. एवं श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लेकर मोक्षित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया गया।
टेंडर में यही तीन फर्मे हुई शॉर्टलिस्ट
विवेचना में यह भी तथ्य सामने आया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कुछ फर्मों द्वारा आपसी समन्वय और कार्टलाइजेशन किया गया। टेंडर में यही तीन फर्मे शॉर्टलिस्ट हुई थीं, जिनके वित्तीय दर खोले गए। तीनों पात्र फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण समान पैटर्न में भरा गया। जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों द्वारा समान रूप से दर्शाया गया। दर भी समान पैटर्न में कोट किए गए, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित द्वारा, उसके पश्चात आर.एम.एस. तथा श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई।
एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर की बिक्री
फलस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए अनुचित भुगतान प्राप्त किया गया, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रूपये की आर्थिक क्षति पहुँची है। गिरफ्तार आरोपियों को विशेष न्यायालय (भ्र. नि.अ.), रायपुर के समक्ष प्रस्तुत कर 27 जनवरी तक पुलिस रिमाण्ड प्राप्त किया गया है। जनहित से जुड़ी "हमर लैब" योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधितों के विरुद्ध कठोर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
