तीन दिवसीय आदिवासी मेला उपेक्षा का शिकार: माँ तुल देवी मेला में छह राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु, पेयजल-सड़क तक की व्यवस्था नहीं

Maa Tul Devi temple water crisis
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कामकानार मेला स्थल में पेयजल संकट की स्थिति

कामकानार में माँ तुल देवी का तीन दिवसीय मेला प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है, जहां छह राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व सड़क तक की उचित व्यवस्था नहीं है।

गणेश मिश्रा - बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के ग्राम पंचायत कामकानार में हर साल आयोजित होने वाला माँ तुल देवी का तीन दिवसीय विशाल आदिवासी मेला इस बार भी पंचायत और प्रशासन की उपेक्षा के बीच आयोजित होने जा रहा है। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे छह राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, लेकिन मेला स्थल की व्यवस्थाएं ग्रामीणों के स्वयं श्रमदान और चंदा पर ही टिकी हुई हैं।

छह राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
यह परंपरागत मेला बीजापुर जिले में सांस्कृतिक पहचान का बड़ा केंद्र माना जाता है। देवी दर्शन के लिए लंबी दूरी तय कर हजारों लोग आते हैं तथा आदिवासी परंपरा के अनुसार विभिन्न स्थानों से देवी-देवताओं का आगमन भी होता है। इसके बावजूद पंचायत स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कोई तैयारी नहीं होती।

ग्रामीणों पर पूरा भार
हर साल की तरह इस बार भी ग्रामीण ही चंदा इकट्ठा कर अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले की सारी जिम्मेदारी ग्रामीणों पर ही है, जबकि यह कार्य पंचायत स्तर पर आसानी से किया जा सकता था।

पेयजल संकट गहराया
मेला स्थल में लगाए गए दो हैंडपंपों में से एक साल भर से खराब है। 26 से 28 जनवरी तक आयोजित होने वाले मेले में पेयजल की बड़ी समस्या सिर पर खड़ी है। मेला समिति का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद पंचायत ने न हैंडपंप सुधरवाया न कोई नई व्यवस्था की।

सड़क-ठहरने की व्यवस्था बदहाल
मंदिर तक जाने वाली सड़क की भी हालत बेहद खराब है। श्रद्धालुओं के ठहरने या विश्राम की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार सरपंच और सचिव को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक न सड़क बनी और न ही मेला स्थल को व्यवस्थित किया गया।

निसंतान दंपतियों की आस्था का केंद्र
माँ तुल देवी का यह मंदिर निसंतान दंपतियों के लिए अत्यंत मान्य स्थल माना जाता है। मनोकामना पूर्ण होने पर दंपति यहां आकर चढ़ावा चढ़ाते हैं। ऐसी आस्था के बावजूद आवश्यक सुविधाओं का अभाव प्रशासन पर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों की अपील
मेला समिति और ग्रामीणों ने हरिभूमि-INH24 के माध्यम से शासन-प्रशासन से मांग की है कि मंदिर प्रांगण में तत्काल पेयजल की उचित व्यवस्था की जाए और मेला स्थल का विकास कराया जाए, ताकि अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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