पीएम कृषि सिंचाई योजना: बस्तर में अब धरती के भीतर छिपे पानी के उपयोग की कोशिश, भू-जल पर बड़ा दांव

भू-जल स्रोत (फाइल फोटो)
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 भू-जल स्रोत 

बस्तर में अब तक भू-जल का अब तक सीमित उपयोग ही हो गपाया है। सिंचाई रकबा बढ़ाने को बनाई गई ठोस कार्ययोजना, हर खेत तक पानी पहुंचाने की तैयारी।

अनिल सामंत- जगदलपुर। बस्तर संभाग में प्रचूर प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आज भी बड़ी आबादी सिंचाई सुविधाओं से वंचित है, जिससे कृषि पूरी तरह मानसून पर निर्भर बनी हुई है। सतही जल परियोजनाओं के सीमित विस्तार और पुरानी योजनाओं की जर्जर स्थिति के बीच अब शासन ने सिंचाई के वैकल्पिक और प्रभावी माध्यम के रूप में भू-जल पर फोकस बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 'हर खेत तक पानी' पहुंचाने की दिशा में भू-जल आधारित सिंचाई को बढ़ावा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अब तक बस्तर में कई मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं के लिए सर्वे तो किए गए, लेकिन स्थानीय विरोध और अन्य कारणों से कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना को छोड़कर अधिकांश योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं। वहीं, पहले से संचालित कई सिंचाई परियोजनाएं मरम्मत और पुनरुद्धार की मांग कर रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए भू-जल के माध्यम से सिंचाई रकबा बढ़ाने को व्यवहारिक समाधान माना जा रहा है।


15 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य
विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर जिले के प्रत्येक विकासखंड में बरसाती नाले मौजूद हैं, जिनका अधिकांश जल बारिश के बाद बिना उपयोग के बहकर निकल जाता है। यदि इन नालों पर छोटे-छोटे बांध, स्टॉपडेम और भू-जल रिचार्ज संरचनाएं विकसित की जाएं, तो व्यापक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने भू-जल के माध्यम से अतिरिक्त 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए कार्ययोजना बनाकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं कई स्थानों पर पम्प हाउस और केनाल की संरचनाएं
बस्तर जिले में बहने वाली इन्द्रावती और नारंगी नदी के किनारे मध्यप्रदेश शासनकाल में उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं के तहत पम्प हाउस और केनाल का निर्माण किया गया था, लेकिन वर्तमान में कई स्थानों पर ये संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और मरम्मत की आवश्यकता है। यदि इन परियोजनाओं का पुनरुद्धार कर भू-जल आधारित योजनाओं से जोड़ा जाए, तो सिंचाई रकबा उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है। इससे न केवल खेतों तक पानी पहुंचेगा,बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।प्रदेश में सिंचाई रकबा बढ़ाने और पुरानी परियोजनाओं की मरम्मत कर किसानों को लाभ पहुंचाने के निर्देश मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़) विष्णुदेव साय द्वारा दिए गए हैं।

भू-जल आधारित सिंचाई की क्रमबद्ध कार्ययोजना
भू-जल के सीमित उपयोग को देखते हुए पहले चरण में प्रत्येक विकासखंड में उपलब्ध बरसाती नालों की पहचान की जाएगी, दूसरे चरण में छोटे-छोटे बांध और स्टॉपडेम बनाकर जल संरक्षण व रिचार्ज किया जाएगा, तीसरे चरण में ट्यूबवेल व पम्प आधारित सिंचाई संरचनाएं विकसित की जाएंगी, चौथे चरण में पुरानी उद्वहन व केनाल परियोजनाओं की मरम्मत कर उन्हें जोड़ा जाएगा और अंतिम चरण में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों के खेतों तक नियमित सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

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