बसंत पंचमी पर विशेष: गजकेसरी संग सर्वार्थ सिद्धि संयोग, सूर्य-बुध बनाएंगे बुधादित्य योग

मां सरस्वती
ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विशेष योग-संयोग में आज पूजा-अर्चना होगी। हर साल माघ माह की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया धार्मिक जाता है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था, इसलिए बसंत पंचमी को सरस्वती जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन विद्या और कला की देवी विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है। इस दिन कई दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।
बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही इस दिन चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। गजकेसरी योग बहुत ही शुभ माना जाता है। इस योग में देवी सरस्वती की पूजा करने से छात्रों को उत्तम फलों की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा 23 जनवरी यानी बसंत पंचमी के दिन बुधादित्य योग का विशेष योग भी बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग करियर, शिक्षा और व्यापार में तरक्की देने वाला माना जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता मिलती है।
मिलेंगे 3 विशेष मुहूर्त
- इस साल सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक बना रहेगा।
- द्वितीय मुहूर्त अभिजीत दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट कर रहेगा।
- तृतीय मुहूर्त अमृतकाल सुबह 09 बजकर 31 मिनट से 11:05 तक रहेगा।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का योग व चार ग्रहों की युति
पंचांग के अनुसार, माघ माह की पंचमी तिथि का आरंभ गुरुवार मध्यरात्रि पश्चात 2 बजे हो चुका है।। पंचमी तिथि का समापन 24 जनवरी अर्थात आज मध्यरात्रि पश्चात 1 बजकर 46 मिनट पर होगा। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
बसंत पंचमी पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र बना रहेगा, जो दोपहर 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का योग रहेगा। इस दिन परिध और शिव योग भी बना हुआ है। ज्योतिषियों के मुताबिक, मकर में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र विराजमान हैं। इन ग्रहों की युति से चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। ऐसे में बसंत पंचमी पर इसका शुभ प्रभाव भी बना रहेगा।
