MGNREGA पर कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस: अमितेश शुक्ल बोले- नाम बदलना गरीबों के अधिकारों पर हमला

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर बवाल
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पूर्व विधायक अमितेश शुक्ल

बलौदाबाजार जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने के विरोध में अमितेश शुक्ल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

कुश अग्रवाल- बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान राजिम विधानसभा से पूर्व विधायक अमितेश शुक्ल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

पूर्व विधायक अमितेश ने कहा कि, मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर लोकसभा में एक और बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को कमजोर कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच, ग्राम स्वराज और गरीबों के काम के अधिकार को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि, मनरेगा सिर्फ़ एक योजना नहीं, बल्कि देश के 12 करोड़ से अधिक मजदूरों के लिए जीवन रेखा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इस योजना ने ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी। अब सरकार ने न सिर्फ़ गांधीजी का नाम हटाया है, बल्कि मजदूरों के अधिकारों को भी कुचल दिया है।

लगभग 7 करोड़ मजदूरों को किया बाहर- शुक्ल
अमितेश शुक्ल का आरोप लगाया कि, 2014 से प्रधानमंत्री मोदी मनरेगा के खिलाफ़ रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में बजट कटौती, राज्यों का फंड रोकना, जॉब कार्ड हटाना और आधार आधारित भुगतान लागू कर लगभग 7 करोड़ मजदूरों को बाहर कर दिया गया। नतीजतन, अब मजदूरों को साल में सिर्फ़ 50–55 दिन ही काम मिल पा रहा है।

सरकार के फैसलों पर कांग्रेस के मुख्य आरोप

1. अधिकार खत्म, अब सिर्फ़ स्कीम बनी मनरेगा: पहले मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत काम का अधिकार देती थी। नया फ्रेमवर्क इसे केंद्र नियंत्रित, सशर्त योजना बना रहा है। अब मजदूरों का अधिकार सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गया है।
2. राज्यों पर डाला गया आर्थिक बोझ: पहले मनरेगा पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा फंडेड थी। अब राज्यों को करीब ₹50,000 करोड़ का 40% खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि श्रेय केंद्र ले रहा है।
3. रोजगार पर समयबद्ध रोक: नए सिस्टम में तय समय के लिए रोजगार बंद करने का प्रावधान है। फंड खत्म होने या फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक काम नहीं मिलेगा।
4. पंचायतों से छीनी गई ताकत: ग्राम सभाओं और पंचायतों के अधिकार अब डिजिटल सिस्टम, GIS मैपिंग, डैशबोर्ड और बायोमेट्रिक निगरानी को सौंपे जा रहे हैं।

कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
अमितेश शुक्ल ने कहा कि, यह कोई सुधार नहीं, बल्कि गरीबों से उनका संवैधानिक अधिकार छीनने की कोशिश है। सत्ता के नशे में चूर सरकार लोकतंत्र और संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि, यदि मनरेगा के साथ हो रहे अन्याय को नहीं रोका गया, तो पार्टी सड़क से संसद तक आंदोलन करेगी।

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