खरीदी केंद्र से संग्रहण तक नहीं पहुँचा धान: 5 दिन से लापता ट्रक जंगल में लावारिस मिला, 200 से अधिक कट्टा गायब

खरीदी केंद्र से संग्रहण तक नहीं पहुँचा धान
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जंगल में मिला धान से भरा ट्रक

बालोद जिले में गुण्डरदेही ब्लॉक से संग्रहण केंद्र के लिए निकला 900 कट्टा धान से भरा ट्रक 5 दिन तक लापता रहा और कांकेर सीमा से लगे जंगल में लावारिस मिला।

राहुल भूतड़ा- बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सरकारी धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। धान खरीदी केंद्र से संग्रहण केंद्र तक पहुंचने वाला सरकारी धान रास्ते में ही गायब हो गया और पांच दिन बाद जंगल में लावारिस हालत में मिला। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है।

दरअसल, गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम कोड़ेवा स्थित धान खरीदी केंद्र से 13 जनवरी को एक ट्रक में करीब 900 कट्टा धान भरकर संग्रहण केंद्र मालीघोरी के लिए रवाना किया गया था। नियमों के मुताबिक, ट्रक को 24 घंटे के भीतर संग्रहण केंद्र पहुंचना था और पूरे रास्ते ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए उसकी निगरानी होनी चाहिए थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि, ट्रक पांच दिनों तक संग्रहण केंद्र नहीं पहुंचा।

जिला प्रशासन में मचा हड़कंप
17 जनवरी को यह धान से भरा ट्रक बालोद जिले के अंतिम छोर पर, कांकेर जिले से लगे ग्राम बड़भूम के जंगल में दमकसा मार्ग पर लावारिश हालत में खड़ा मिला। ग्रामीणों और स्थानीय पत्रकारों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। देर रात मौके पर जिला विपणन अधिकारी, जिला सहकारिता अधिकारी, नोडल अधिकारी, तहसीलदार और पुलिस दल पहुंचा।

अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
प्रारंभिक जांच में अंदेशा जताया जा रहा है कि, ट्रक से 200 से अधिक धान कट्टे गायब हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ट्रैकिंग सिस्टम लागू है, तय समय-सीमा में धान को संग्रहण केंद्र पहुंचना अनिवार्य है, तो फिर पांच दिनों तक ट्रक कहां रहा? इस दौरान कोड़ेवा समिति प्रबंधक, ट्रांसपोर्टर और जिला विपणन विभाग के अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे? अब अधिकारी मामले की जांच की बात कर रहे हैं, लेकिन जिस व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर थी, वही इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में हैं।


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