21 थानों को कंट्रोल करेंगे 6 आईपीएस: राजधानी के पहले कमिश्नर संजीव शुक्ला ने संभाला काम

21 थानों को कंट्रोल करेंगे 6 आईपीएस : राजधानी के पहले कमिश्नर संजीव शुक्ला ने संभाला काम
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राजधानी की पुलिसिंग व्यवस्था शुक्रवार को दो भागों में बंट गई। एक भाग पुलिस कमिश्नरेट में शामिल हो गया, जबकि दूसरा हिस्सा रायपुर ग्रामीण में बंट गया।

रायपुर। राजधानी की पुलिसिंग व्यवस्था शुक्रवार को दो भागों में बंट गई। एक भाग पुलिस कमिश्नरेट में शामिल हो गया, जबकि दूसरा हिस्सा रायपुर ग्रामीण में बंट गया। राजधानी के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में संजीव शुक्ला तथा रायपुर ग्रामीण एसपी के रूप में श्वेता सिन्हा ने पदभार ग्रहण किया। इसके साथ ही 2020 बैच की आईपीएस राजनाला स्मृतिक ने क्राइम डीसीपी का चार्ज लिया है। इसके साथ ही अन्य पुलिस अफसर जिनकी यहां पूर्व से पोस्टिंग है, उन सभी का शुक्रवार से पदनाम बदल गया है।

नए पुलिस कमिश्नर श्री शुक्ला ने पदभार ग्रहण करने के बाद हरिभूमि से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता अपराध नियंत्रण कर सामंजस्य स्थापित करना है। पुलिस आयुक्त ने बेसिक पुलिसिंग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिबंधित मादक पदार्थ के तस्करी चैनल को तोड़ने मादक पदार्थ की तस्करी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही। रायपुर ग्रामीण एसपी श्वेता सिन्हा ने ग्रामीण क्षेत्र में अपराध नियंत्रण करने पुलिसिंग को मजबूत करने के साथ ही अपराध नियंत्रण करने ग्रामीण क्षेत्र में मुखबिर तंत्र को मजबूत करने की बात कही।

अफसरों की संख्या हुई दोगुनी
पूर्व में दो आईपीएस अधिकारी जिनमें एक रेंज आईजी था, जिले में एक एसएसपी के साथ रायपुर शहर, ग्रामीण तथा नवा रायपुर के लिए चार पुरव एएसपी साथ ही ट्रैफिक, एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा महिला संबंधित अपराध रोकने एएसपी सहित कुल छह अफसर होते थे। इसके साथ ही नौ डीएसपी स्तर के अधिकारी जिनमें ट्रैफिक के साथ एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट के सीएसपी होते थे, पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद आईपीएस के साथ राजपत्रित पुलिस अफसरों की संख्या दोगुनी हो गई है।

21 थानों को कंट्रोल करने आधा दर्जन आईपीएस
राजधानी में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद शहरी क्षेत्र में 21 थाना क्षेत्र शामिल हैं। 21 थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत करने हर चार थाना के पीछे एक आईपीएस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही हर थाने में एक राजपत्रित पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा इन थानों में एसएचओ (टीआई) होंगे।

बल बंटवारा करने में होगी परेशानी
पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू तो कर दी गई है, लेकिन बल को लेकर शासन स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया है। वर्तमान में रायपुर शहरी के साथ ग्रामीण क्षेत्र को जोड़कर 2750 का बल है। शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र के अलग होने के बाद बल बंटवारा करने परेशानी का सामना करना पड़ेगा। थानों के हिसाब से दो तिहाई बल कमिश्नरेट में शामिल होगा। एक तिहाई बल ग्रामीण क्षेत्र में होने से ग्रामीण क्षेत्र में बल की भारी कमी होगी। ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्र में तत्काल बल की पूर्ति करनी होगी। ग्रामीण थानों में बल की संख्या एक हजार से नीचे हो जाएगी।

अलग कोर्ट की व्यवस्था करनी पड़ेगी
पुलिस कमिश्नरेट को पूरी तरह अस्तित्व में आने में एक महीने का वक्त लग सकता है। इसका कारण यह है कि पुलिस कमिश्नरेट में अफसरों की नियुक्ति कर दी गई है। अफसरों की नियुक्ति के बाद पुलिस कमिश्नर के साथ जितने डीसीपी तथा एसीपी हैं, उन सभी के लिए अलग से कोर्ट की व्यवस्था करनी होगी। दिए गए मजिस्ट्रयल पॉवर के तहत पुलिस अधिकारी आरोपियों को जेल भेज सकते हैं। ऐसे में बदमाशों के खिलाफ अनुशंसा की गई जिलाबदर, रासुका, हथियार लाइसेंस की सुनवाई के जितने मामले है, उसकी सुनवाई पूर्व की तरह जिला दंडाधिकारी के कोर्ट में होगी। जानकारों के अनुसार जिन लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है, उन्हें पुलिस कमिश्नरेट के अधिकरी अपनी शक्ति का उपयोग करते हुए जेल भेज सकते हैं।

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