25 साल का छत्तीसगढ़: ईमानदार और कुशल सरकारी प्रयासों से विकास पथ पर सरपट दौड़ रहा प्रदेश

छत्तीसगढ़ का 25 साल बेमिसाल
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 25 वर्षों की विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ ने हर क्षेत्र में रचे नए कीर्तिमान 

छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों का विकास सरकार की सुशासन, जनकल्याणकारी नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक औद्योगिक विस्तार की प्रेरक कहानी है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के गठन के समय राज्य को संसाधनों के बावजूद अविकसित माना जाता था। प्रशासनिक ढांचा, राजधानी का स्वरूप, जिलों का पुनर्गठन और आधारभूत विकास ये सभी चुनौतियाँ थीं। लेकिन 25 वर्षों की यात्रा में सरकार की नीतियों ने छत्तीसगढ़ को एक मजबूत, स्थिर और विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ा दिया है।

शुरुआती चुनौतियाँ और मजबूत प्रशासनिक नींव
राज्य बनने के बाद प्रशासनिक संरचना स्थापित करना सबसे बड़ी आवश्यकता थी। अस्थायी व्यवस्थाओं में चल रही विधानसभा हो या नए विभागों का गठन, हर कदम एक नए राज्य की पहचान बनाने की दिशा में था। भाजपा सरकार ने इस प्रक्रिया को संगठित, तेज और पारदर्शी बनाया, जिससे शासन प्रणाली मजबूत हुई।


नवा रायपुर: आधुनिक राजधानी का उदय
अटल नगर (नवा रायपुर) को भारत की सबसे योजनाबद्ध राजधानियों में विकसित किया गया। चौड़ी सड़कें, आधुनिक भवन, डिजिटल प्रशासन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित व शहरी विकास का संतुलन इन सबने इसे आधुनिक शासन का प्रतीक बना दिया।

वन संसाधनों से ग्रामीण समृद्धि तक का विस्तार
वनोपज छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ है। भाजपा सरकार ने इसे आजीविका का मजबूत साधन बनाते हुए तेंदूपत्ता का मूल्य 400 से बढ़ाकर 5,500 रुपये किया। समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या को 7 से 67 तक बढ़ाकर लाखों परिवारों को स्थिर आय दी गई। वन धन योजना ने हजारों महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता का अवसर दिया।


जल संरक्षण और जल जीवन मिशन की सफलता
जल जीवन मिशन के तहत जनवरी 2026 तक 41.8 लाख से अधिक ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे 32 लाख से अधिक परिवारों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है। मिशन का लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर पानी उपलब्ध कराना है, और राज्य के 6,572 गांव अब तक 100% लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं।

ईको-टूरिज्म के जरिए रोजगार और पर्यावरण संरक्षण
चित्रकोट जैसे पर्यटन स्थलों को विकसित कर स्थानीय युवाओं को व्यापक रोजगार मिला। ईको-टूरिज्म मॉडल ने न केवल प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा दिया बल्कि पर्यटन आधारित आय के नए अवसर भी पैदा किए।


ग्रामीण सड़कों के विस्तार ने बदली राज्य की तस्वीर
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 40 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण हुआ। सड़कों ने दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच आसान कर दी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें विकास और सुरक्षा का आधार बनीं।

कृषि और किसान केंद्रित विकास नीति
धान उत्पादक राज्य के रूप में कृषि को मजबूती देना भाजपा सरकार की प्राथमिकता रही। धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया, भुगतान को ऑनलाइन किया गया, और समर्थन मूल्य में वृद्धि से किसानों की आय को स्थिरता मिली। सिंचाई विस्तार योजनाओं ने कृषि को स्थायी और लाभकारी बनाया।


स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण और व्यापक लाभ
आयुष्मान भारत सहित राज्य स्तरीय योजनाओं ने गरीबों और मध्यम वर्ग को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराईं। जिला अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया और नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना की गई।

शिक्षा और कौशल विकास की नई दृष्टि
राज्य में नए विश्वविद्यालय, कॉलेज, ITI और कौशल विकास केंद्र स्थापित हुए, जिससे युवाओं को रोजगार-उन्मुख शिक्षा मिली। स्किल डेवलपमेंट मिशन्स ने उद्योगों की मांग के अनुसार युवा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा का दोहरा मॉडल
छत्तीसगढ़ ने सुरक्षा और विकास को साथ लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास की नई नींव रखी। सड़कों, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और पानी जैसी सुविधाओं ने इन क्षेत्रों में स्थायी परिवर्तन की आधारशिला रखी। शासन और जनता के बीच संवाद ने सामाजिक विश्वास को और मजबूत किया।

औद्योगिक विकास: संसाधनों से नवाचार की ओर बड़ा कदम
नई औद्योगिक नीति 2024-2030 ने छत्तीसगढ़ को निवेश का केंद्र बना दिया है। 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव, लिथियम ब्लॉक ऑक्शन, सेमीकंडक्टर प्लांट, AI डेटा सेंटर पार्क और लॉजिस्टिक्स नीति ने राज्य को उद्योगों का हब बना दिया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम, फास्ट-ट्रैक अप्रूवल और भूमि आवंटन का डिजिटलीकरण Ease of Doing Business को नई ऊँचाई दे रहे हैं।


हरित और समावेशी उद्योगों की नई पहचान
छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज आधारित राज्य नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, ई-वाहन, सौर ऊर्जा, जैव ईंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रीन इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों में देश का अग्रणी केंद्र बन रहा है। महिला कारीगरों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी ने औद्योगिक विकास को समावेशी बनाया है।

भविष्य की दिशा: आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित छत्तीसगढ़
आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस, हरित ऊर्जा, आधुनिक उद्योग और मानव पूंजी विकास पर आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में राज्य आत्मनिर्भरता, विकास और जनसरोकारों के संतुलित मॉडल पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

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