दो राज्यों की बीच फंसी 10वीं-12वीं की अंकसूची: छत्तीसगढ़ ने कहा-आवेदन भेजे गए, एमपी बोला-एक भी डंप नहीं

File Photo
रायपुर। यदि आपने वर्ष 2000 के पहले दसवीं या बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है और आपकी अंकसूची खो गई है तो डूप्लीकेट प्रति प्राप्त करने की उम्मीद मत रखिएगा। ऐसा हम छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के मध्य चल रही तनातनी के कारण कह रहे हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ के जिन विद्यार्थियों ने वर्ष 2000 के पूर्व दसवीं-बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है, उनकी अंकसूची में मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल अंकित है। मप्र मंडल अंकित लोगों की अंकसूची का मुद्रण मध्यप्रदेश ही करने के लिए अधिकृत है छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के पास वर्ष 2000 के पूर्व अंकसूची के लिए जो आवेदन आते हैं, उन्हें मध्यप्रदेश प्रेषित किया जाता है जो डंप हो रहे हैं। इधर, मप्र का दावा है कि बंटवारे में छत्तीसगढ़ को सभी रिकॉर्ड दिए जा चुके हैं। यहां ऐसा कोई भी आवेदन डंप नहीं है। बीते दो वर्षों से यही स्थिति है।
छत्तीसगढ़ से भेजे गए आवेदनों के आधार पर मप्र बोर्ड अंकसूची उपलब्ध कराता है। तत्पश्चात इनका वितरण उन छात्रों को किया जाता है, जिन्होंने डूप्लीकेट अंकसूची के लिए आवेदन किया हो। मध्यप्रदेश बोर्ड स्टेशनरी अर्थात अंकसूची प्रदान नहीं कर रहा है। अंकसूची ही नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल अंकों की छपाई नहीं कर पा रहा है और ना ही अंकसूची की छायाप्रति उपलब्ध करा पा रहा है। मध्यप्रदेश बोर्ड का कहना है कि वे छत्तीसगढ़ को बंटवारे के वक्त पूरे रिकॉर्ड सौंप चुके हैं। छत्तीसगढ़ मंडल द्वारा स्टेशनरी के संदर्भ में लिखे गए खत का जवाब भी मप्र बोर्ड द्वारा दिया गया है, लेकिन अब स्टेशनरी को लेकर स्पष्ट बयान उनके द्वारा नहीं दिया जा रहा। वहीं । छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आवेदनकर्ता छात्रों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मप्र द्वारा स्टेशनरी नहीं देने के कारण वे अंकसूची देन में असमर्थ हैं।
मप्र बोर्ड : छत्तीसगढ़ को सौंप चुके रिकॉर्ड
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के जनसंपर्क अधिकारी भूपेश गुप्ता ने पूरे प्रकरण पर कहा, जब मार्कशीट तैयार होती है, तब एक कॉपी बच्चे को दी जाती है, दूसरी मंडल के पास होती है, जिसे काउंटर फाइल बोला जाता है। उसी के आधार पर बच्चे को दूसरी बार मार्कशीट तैयार कर दी जाती है। वह रिकार्ड मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ विभाजन के बाद उस समय ही छत्तीसगढ बोर्ड को सौंप दिया गया था। मेरी जानकारी में ऐसा कोई आवेदन नहीं है कि रिकार्ड छत्तीसगढ़ बोर्ड में नहीं है या मार्कशीट नहीं दी जा रही है। यदि छत्तीसगढ बोर्ड को कोई परेशानी है तो वह यहां पर बात करें। जब उनके पास रिकार्ड मौजूद है तो यहां से किसी रिकार्ड की जरूरत ही नहीं है। विद्यार्थी वहां से मार्कशीट ले सकते हैं। हमारे यहां कोई आवेदन पेंडिंग नहीं है।
छत्तीसगढ़ बोर्ड : थोक में खत भेज चुके छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा
मंडल की सचिव पुष्पा साहू ने पूरे प्रकरण पर कहा, मध्यप्रदेश बोर्ड के जनसंपर्क अधिकारी को यदि जानकारी नहीं है, तो ऐसे बयान ना दें। हमने वर्ष 2000 के पूर्व की अंकसूची के लिए थोक में खत लिखे हैं। अपने आदमी भी इसके लिए भेजे थे। स्टेशनरी उनका दायरा है। यदि हमारे पास रिकार्ड है तब भी हम किसी अन्य बोर्ड की अंकसूची कैसे छाप सकते हैं? आवेदन पेंडिंग हैं, इसलिए आवेदनकर्ताओं को अंकसूची प्रदान करने में दिक्कतें हो रही हैं।
2024 से आवेदन
पुरानी स्टेशनरी समाप्त होने के बाद 2024 से ही माशिम द्वारा इसके लिए आवेदन प्रेषित किए जा रहे हैं। मामले को लेकर पत्र व्यवहार करने के अतिरिक्त छग माध्यमिक शिक्षा मंडल कई माह पूर्व अपना प्रतिनिधि भी भेज चुका है। यहां भी उन्हें निराश होकर ही लौटना पड़ा। छग माध्यमिक शिक्षा मंडल उन सभी विद्यार्थियों को वापस लौटा रहा है, जिन्होंने बंटवारे के पहले बोर्ड परीक्षा दिलाई थी और अब अपनी अंकसूची खो बैठे हैं। जो छात्र आवेदन कर चुके हैं, वे अपने आवेदन का स्टेट्स जानने नियमित रूप से पहुंचने रहे हैं। उन्हें पिछले दो वर्षों से स्टेशनरी ना होने की बात कहकर ही लौटाया जा रहा है। अंदरुनी सूत्रों के अनुसार, सैकड़ा की संख्या में आवेदन पेंडिंग हैं।
माइग्रेशन बुक भी नहीं
माशिम ने उन विद्यार्थियों की सूची प्रेषित की है, जिन्होंने 2000 के पूर्व परीक्षा उत्तीर्ण की है। इनमें 1979, 1983, 1986 के भी विद्यार्थी हैं। सर्वाधिक संख्या 2000 सत्र के छात्रों की है। माशिम ने जो स्टेशनरी की सूची भेजी है, उसमें माइग्रेशन बुक भी शामिल है। पूर्व में विद्यालयीन पढ़ाई केवल 11 वीं कक्षा तक ही होती थी। ऐसे में पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर बनी अंकसूची भी मांगी गई है।
