'ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस': गर्भवती बनाओ और 10 लाख कमाओ! पुलिस ने किया 'बेबी मेकिंग' स्कैम का पर्दाफाश

गर्भवती बनाओ और 10 लाख कमाओ! पुलिस ने किया बेबी मेकिंग स्कैम का पर्दाफाश
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पीड़ितों को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए ठगों ने एक विशेष 'रेट कार्ड' तैयार किया था।

ठग सोशल मीडिया पर निःसंतान महिलाओं को गर्भवती करने के बदले पुरुषों को 10 लाख रुपये देने का लालच देते थे। युवाओं से रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी के नाम पर लाखों की ठगी की जा रही थी।

नवादा: बिहार के नवादा जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने साइबर अपराध के नए और घिनौने चेहरे को उजागर कर दिया है। यहाँ के शातिर ठगों ने बेरोजगार युवाओं को शिकार बनाने के लिए 'ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस' नामक एक फर्जी स्कीम चलाई थी।

इस गिरोह ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को यह लालच दिया कि वे अमीर और निःसंतान महिलाओं को गर्भवती कर रातों-रात लखपति बन सकते हैं। पुलिस की हालिया कार्रवाई में यह खुलासा हुआ है कि यह महज एक अनैतिक झांसा था, जिसके जरिए हजारों लोगों से रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए गए।

नवादा का यह इलाका अब साइबर ठगी के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहाँ अपराधी जामताड़ा की तर्ज पर लोगों की मजबूरी और लालच का फायदा उठा रहे हैं।

लाखों रुपये की कमाई और लग्जरी लाइफ का झूठा वादा

ठगों का यह नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करता था। इन विज्ञापनों में दावा किया जाता था कि ऐसी अमीर महिलाएं, जिन्हें संतान सुख नहीं मिल पाया है, वे मां बनने के बदले किसी भी पुरुष को 10 लाख रुपये तक देने को तैयार हैं।

गिरोह के सदस्य खुद को इस सर्विस का 'एजेंट' बताते थे और युवाओं को यह भरोसा दिलाते थे कि इस काम में गोपनीयता रखी जाएगी और बदले में उन्हें जीवन भर के लिए आर्थिक आजादी मिल जाएगी।

सांत्वना पुरस्कार और रेट कार्ड का मनोवैज्ञानिक जाल

पीड़ितों को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए ठगों ने एक विशेष 'रेट कार्ड' तैयार किया था। इसमें कहा जाता था कि सफल होने पर 10 लाख रुपये मिलेंगे, लेकिन यदि प्रयास असफल रहता है, तब भी पुरुष को निराश नहीं किया जाएगा।

उसे 'सांत्वना पुरस्कार' के तौर पर 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का भुगतान किया जाएगा। इस तरह के दावों से युवाओं को लगता था कि इसमें खोने के लिए कुछ भी नहीं है और वे आसानी से ठगों के चंगुल में फंस जाते थे।

रजिस्ट्रेशन फीस से शुरू होकर लाखों तक पहुंचती थी ठगी

ठगी की प्रक्रिया बहुत ही व्यवस्थित थी। जैसे ही कोई युवक दिए गए नंबर पर कॉल करता, उससे सबसे पहले 'पंजीकरण शुल्क' के रूप में 799 रुपये या 1100 रुपये मांगे जाते थे। इसके बाद उसे कुछ महिलाओं की फर्जी तस्वीरें भेजी जाती थीं और पसंद करने को कहा जाता था।

एक बार जब पीड़ित झांसे में आ जाता, तो उससे जीएसटी, फाइल चार्ज, मेडिकल चेकअप फीस और सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर किश्तों में मोटी रकम वसूली जाती थी। पैसे मिलने के बाद ठग उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर देते थे।

नवादा पुलिस की बड़ी कार्रवाई और बरामदगी

वारिसलीगंज और नवादा के अन्य क्षेत्रों में मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस कप्तान के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने जब संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से कई युवक रंगे हाथों फर्जी कॉल करते पकड़े गए।

पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मोबाइल फोन, सैकड़ों सिम कार्ड जो फर्जी आईडी पर लिए गए थे, और कई बैंक पासबुक बरामद की हैं। जांच में यह भी पता चला है कि इन अपराधियों का नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ है।

अश्लीलता और लालच के खिलाफ पुलिस की चेतावनी

इस खुलासे के बाद पुलिस ने आम जनता, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे इंटरनेट पर मौजूद ऐसे किसी भी अश्लील या अनैतिक ऑफर पर विश्वास न करें।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों की गोपनीयता और बदनामी के डर का फायदा उठाता था, क्योंकि ठगी का शिकार होने के बाद कई लोग शर्मिंदगी की वजह से शिकायत दर्ज कराने सामने नहीं आते थे।

प्रशासन अब इन अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने और इनके मास्टरमाइंड तक पहुंचने की तैयारी कर रहा है।

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