बिहार: गोह विधानसभा चुनाव के नतीजों पर संकट? पटना हाई कोर्ट ने राजद विधायक को जारी किया नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला

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पटना हाई कोर्ट ने गोह विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है।

पटना हाई कोर्ट ने गोह विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने राजद विधायक अमरेंद्र कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पढ़ें पूरी खबर।

Goh Assembly Election Petition: बिहार की गोह विधानसभा सीट पर साल 2025 में हुए चुनाव के नतीजों को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। पटना हाई कोर्ट ने इस सीट से निर्वाचित राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक अमरेंद्र कुमार के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया है। न्यायमूर्ति एस. बी. पी. सिंह की एकलपीठ ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए विजयी उम्मीदवार अमरेंद्र कुमार सहित अन्य संबंधित प्रतिवादियों को औपचारिक नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस कदम से क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है।

भाजपा प्रत्याशी ने लगाए चुनाव में धांधली के गंभीर आरोप

यह कानूनी मामला गोह विधानसभा चुनाव में नजदीकी अंतर से पराजित हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी डॉ. रणविजय सिंह द्वारा दायर किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई। डॉ. रणविजय सिंह ने अपनी याचिका में वर्ष 2025 के चुनाव परिणामों को शून्य घोषित करने की मांग करते हुए प्रशासन और निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी होती, तो परिणाम कुछ और ही होते।

वोटों का गणित और जीत-हार का कम अंतर

उल्लेखनीय है कि गोह विधानसभा क्षेत्र में 11 नवंबर 2025 को वोट डाले गए थे और 14 नवंबर को चुनावी नतीजे घोषित हुए थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजद उम्मीदवार अमरेंद्र कुमार को कुल 93,624 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के डॉ. रणविजय सिंह के खाते में 89,583 मत आए थे। महज 4,041 वोटों के मामूली अंतर से जीत-हार का फैसला हुआ था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसी कम अंतर का फायदा उठाने के लिए मतगणना और मतदान के दौरान गड़बड़ियां की गईं, जिससे उनके समर्थक मतदाताओं के अधिकारों का हनन हुआ।

नामांकन से लेकर मतगणना तक अनियमितताओं का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता निवेदिता निर्विकार ने अदालत में दलील दी कि चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया से लेकर अंतिम परिणाम आने तक व्यापक अनियमितताएं बरती गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मतदान केंद्रों पर भाजपा समर्थकों को डरा-धमकाकर वोट डालने से रोका गया। साथ ही, मतगणना के समय पारदर्शिता का अभाव था और कुछ वैध मतों को गिनती में शामिल ही नहीं किया गया। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस संबंध में स्थानीय प्रशासन को शिकायतें दी गई थीं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।

अगली सुनवाई कब?

पटना हाई कोर्ट द्वारा इस याचिका को स्वीकार किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें न्यायालय की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। अदालत ने इस मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 24 फरवरी 2026 की तारीख मुकर्रर की है। तब तक सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि कोर्ट में धांधली के आरोप सिद्ध होते हैं, तो गोह विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल, हाई कोर्ट के नोटिस ने निर्वाचित विधायक और राजद खेमे में हलचल पैदा कर दी है।

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